प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में किसानों को जानकारी देने के लिए उप कृषि निदेशक कार्यालय से सोमवार को प्रचार वाहन को रवाना किया गया। डिप्टी पीडी आत्मा रमेशचंद्र यादव ने वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। खरीफ के फसलों का बीमा कराने की अंतिम अवधि 31 जुलाई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ सीजन 2018 - 19 में जनपद के किसानों को प्राकृतिक आपदाओं बाढ़ , भूस्खलन , रोगों , कीटों आदि से किसी भी फसल के नुकसान होने पर बीमित किसानों को वित्तीय सहायता एवं बीमा कवरेज प्रदान किया जाना है। जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड बनवाए हैं । ऐसे किसान बैंक से प्रस्ताव पत्र देकर अपनी फसलों का बीमा करा सकते हैं। जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है, वे किसान भूअभिलेख एवं बीमा प्रीमियम प्रस्ताव पत्र में बोई गई फसल का विवरण भरकर किसी भी जन सेवा केंद्र या उप कृषि निदेशक कार्यालय में अपना आवेदन कर फसलों का बीमा करवा सकते हैं।
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जैव उर्वरक के लाभ की दी जानकारी
खुटहन। भारत सरकार द्वारा संचालित जैव प्रौद्योगिकी परियोजनांतर्गत काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी में चल रहे शोध कार्य में सम्लित छात्र गोवर्धन कुमार चौहान, दुर्गेश जयसवाल व आनंद कुमार गौरव ने सोमवार को धमौर खास, सौरइया और घुघुरी सुल्तानपुर गावों मे कृषि गोष्ठी आयोजित किया। इस दौरान रासायनिक खादों से होने वाले हानी की जानकारी दी। साथ ही जैविक खाद से होने वाले लाभों के बारे में बताया। शोधार्थी छात्रो ने कहा कि एक किग्रा जैविक खाद बनाने में मात्र पांच से सात रूपये की लागत आती है। उनका दावा है कि खेत में इसके प्रयोग से फसल उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत बढ़ोत्तरी होती है। वही मिट्टी की मृदा शक्ति में भी बृद्धि होती है। खाद के प्रयोग से पैदा होने वाला अन्न स्वास्थ्य वर्धक होता है। इसे खाने से अल्सर, कैंसर, हार्ट अटैक, लकवा, नपुंसकता और हड्डी रोग जैसी बीमारियों से बचाव होता है। इस मौके पर प्रधान गोपीचंद, नंदलाल, भीषम वर्मा, दिनेश, हीरालाल, राधेश्याम, सुधाकर, लाल बहादुर आदि किसान मौजूद रहे।