टीडी कालेज में संचेतना संस्था की ओर से गीतकार गोपालदास नीरज की याद में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। पहले गोपालदास नीरज के व्यक्तित्व व कृतित्व की चर्चा की गई। डा. सुनील विक्रम सिंह ने उनके काव्य का मूल्यांकन करते हुए कहा कि नीरज के काव्य में शृंगार का उल्लास भी है और जीवन दर्शन दोनों है।
डा. महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि नीरज की कविता ‘जीवन नहीं मरा करता है’ जर्नादन अस्थाना ‘आंसू जब सम्मानित होंगे, तुमको याद किया जाएगा’ का वाचन किया। कवि सभाजीत द्विवेदी प्रखर ने गीत जब मर जाएंगे तब यहां क्या रह जाएगा सुना कर सब को भाव विभोर कर दिया। चंद्रभूषण त्रिपाठी ने भी नीरज के गीत सुनाए। डा. पीसी विश्वकर्मा की अध्यक्षता में आयोजित गोष्ठी में गीता श्रीवास्तव ने अवधी गीत सुनाया। रामजीत मिश्र ने पढ़ा खौफ के साए में कितना डर गए है, मौत कितनी मौत बिन हम मर गए हैं। जर्नादन अस्थाना के गीत टूट गया सपना को सभी ने सराहा। ओपी खरे ने अपनी कविता को सुनाया। ओम प्रकाश मिश्र ने अपनी रचना को पढ़ा। धीरेंद्र पटेल ने खिडकियां कविता को सुनाया। आलम गाजीपुरी ने कहा हमने तो आखें ही शहर में खोली है, हम क्या जाने क्या दहलीज है। अजय विक्रम सिंह की कविता मैं उस विजय पर निकल पड़ा को सभी ने सराहा। पीसी विश्वकर्मा ने पढ़ा मालूम गर ये होता कि हर कतरा बहा है क्यों कतरे के बजाय समुंदर खरीदते। डा. विमला सिंह आभार जताया।