जौनपुर। देश के जाने माने कवि गोपालदास नीरज के निधन पर जगह-जगह शोक सभा का आयोजन कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि गोपालदास नीरज के निधन से साहित्य के एक युग का खात्मा हो गया है।
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में प्रख्यात कवि गोपालदास नीरज के निधन पर शोक जताया गया। शिक्षक एवं विद्यार्थियों ने मौन रखकर मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया। विभागाध्यक्ष डा. मनोज मिश्र ने पद्मश्री गोपालदास नीरज के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। पूर्व छात्र युवा कवि विशाल चौबे ने कहा कि गोपालदास नीरज का व्यक्तित्व युवाओं कवियों को सदैव जागृत करता रहेगा। उनकी रचनाएं कवियों के लिए मानक और प्रेरणा है। इस अवसर पर डा. दिग्विजय सिंह राठौर, डा. अवध बिहारी सिंह, डा. सुनील कुमार आदि मौजूद रहे।
हिंदी के जाने माने गीतकार गोपालदास नीरज के निधन पर टीडी कालेज में आयोजित शोकसभा में हिंदी की विभागाध्यक्ष डा. सरोज सिंह ने कहा कि गोपालदास नीरज के निधन से लोकप्रिय हिंदी कविता की परंपरा ठिठक सी गई। मंच पर नीरज जैसा कोई कवि नहीं बचा है। डा. महेंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि कविता के युग का एक कारवां गुजर गया। ऐसा कारवां जो अपने गीतों में संसार को समेटे था। डा. हरिओम त्रिपाठी ने कहा कि गोपालदास की कविताओं में जो मिठास है दूसरी कविताओं में नहीं मिलती। डा. ओपी सिंह ने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर उन्हें हिंदी की वीणा की उपमा देते थे। इस मौके पर डा. वंदना दुबे, डा. शैलेंद्र सिंह, डा. आरएन ओझा ने विचार व्यक्त किया।