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ड्यू डेट के एक साल बाद भी गड्ढा मुक्त नहीं हो सकी सड़कें

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जौनपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष 22 जून तक ही सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के एक साल से भी अधिक समय बीतने के बाद भी सड़कों की दशा नहीं सुधरी। आज भी लोग सड़कों पर हिचकोले खाने को विवश हैं। करीब 50 लाख से भी अधिक आबादी वाले इस जिले में 12555 किलोमीटर सड़कों पर गड्ढे हैं। गड्ढों को भरने के लिए अभियान जरूर चलाया गया लेकिन बजट के अभाव में यह अभियान रफ्तार नहीं पकड़ सका। अब सरकार की तरफ से 25 जुलाई तक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है लेकिन इतनी लंबी सड़कों पर महज एक सप्ताह के भीतक गड्ढे भरा जाना नामुमकिन है।
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जिले में आवागन को सुगम बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग की ओर से 3854 सड़कों का निर्माण कराया गया है। इन सड़कों की कुल लंबाई 6245 किलोमीटर है। सड़कों के इस जाल में 263 किलोमीटर राजमार्ग हैं जबकि 93 किलोमीटर प्रमुख जिला मार्ग हैं। ग्रामीण मार्गों की कुल लंबाई 4800 किलोमीटर है। लोक निर्माण विभाग की ओर से सड़कों की कराई गई पड़ताल में पाया गया है कि 1255 किलोमीटर सड़कें गड्ढे में तब्दील हो चुकी हैं। लोक निर्माण विभाग के तीन अलग अलग खंडों के पास सड़कों का रखरखाव और उसकी मरम्मत की जिम्मेदारी है। पिछले साल ही मुख्यमंत्री ने पूरे प्रदेश की सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के लिए 22 जून तक का समय दिया था। लेकिन इन सड़कों की सूरत मुख्यमंत्री के अल्टीमेटम के एक साल बाद भी नहीं बदल सकीं। नतीजा यह कि दुर्दशाग्रस्त सड़कों पर सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है। गड्ढों में तब्दील सड़कों पर चलने वाले दैनिक यात्री सर्वाइकल और स्पाइंडलाइटिस जैसी बीमारी के शिकार हो रहे हैं और सड़क पर होने वाले हादसों में लोगों की जान तक चली जा रही है। पिछले एक महीने के भीतर हुए सड़क हादसों पर गौर करें तो जिले में हर दूसरे दिन किसी न किसी की जान सड़क हादसे में जा रही है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता केजी सारस्वत का कहना है कि 25 जुलाई तक सड़कों को ठीक करने का अल्टीमेटम मिला है। निर्धारित समय सीमा के भीतर सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
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