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भगवान के नाम मात्र से ही मिल जाती है मुक्ति

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सुजानगंज। काशी से आए आचार्य गणेश महाराज ने कहा कि नारायण नाम मात्र लेने से ही मुक्ति मिल जाती है। अजामिल ब्राह्मण तो था लेकिन उसके जो कर्म थे वह निंदनीय थे। वह ब्राह्मण होने के बाद भी कर्मों से अत्यंत दुष्ट था। एक वेश्या को एक व्यक्ति के साथ जल कुंड में स्नान करते हुए देख और वेश्या के भीगे हुए अंग वस्त्र को देखकर उसके नेत्रों में काम उत्पन्न हुआ और उसे पाने के लिए अपने समस्त परिवार का त्याग करके उस वेश्या के साथ रहकर उसने नव संतानों को जन्म दिया। साधु संतों को लूटना, चोरी करना, अपने दुष्कर्मों से अधम हो गया। अजामिल संतों के ही कृपा मात्र से उसने अपने छोटे पुत्र का नाम नारायण रखा। जो सभी पुत्रों में अत्यंत प्रिय था। जब 80 वर्ष की आयु हुई तब समस्त पाप कर्मों के प्रतिफल जब मृत्यु को सामने देखा और यमदूतों के भयंकर गर्जना और विकृत रूप को देखकर जोर से चिल्ला उठा और नारायण-नारायण का नाम मात्र के सुनकर ही यमदूतों का प्रस्थान हो गया। बैकुण्ठ से भगवान के पार्षदों आए और अजामिल को बैकुण्ठ श्री हरि के पास ले गए। इस प्रकार भगवान के नाम लेने मात्र से ही मुक्ति मिली।
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