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सफाई व दवा के नाम पर पैसे का हो रहा बंदर बाट

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जौनपुर। बरसात में जल जनित बीमारियां बढ़ जाती हैं। दूषित जल से संक्रामक रोग फैलते हैं। ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव और क्लोरीन की गोलियों के वितरण के लिए हर गांव को सरकार दस हजार रुपये की दर से भुगतान करती है। मगर ग्राम प्रधानों की उदासीनता के चलते यह रकम किसी साल पूरी तरह खर्च नहीं हो पाती है और न ही किसी को क्लोरीन की गोलियां बांटी जाती हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक राजस्व गांव में दस-दस हजार रुपये की रकम एएनएम और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में भेजी जाती है। जौनपुर के 3298 राजस्व गांवों हर साल 3.29 करोड़ रुपये खाते में जमा होते हैं। पर यह बजट कब और कहां खर्च होता है किसी को पता नहीं। कुछ गांवों में प्रधान और एएनएम पैसे निकाल कर मनमाने तरीके से उसका इस्तेमाल करते हैं और जहां दोनों में पटरी नहीं बैठती वहां एक रुपया खर्च नहीं होता है। पिछले वित्तीय वर्ष में पहले का दो करोड़ चार लाख 35 हजार रुपया बचा रह गया था। इसमें 88 लाख 65 हजार रुपये और जमा किए गए। इसमें महज 49 लाख 11 हजार रुपया खर्च किया गया है। शेष धनराशि ग्राम प्रधान व एएनएम के खाते में पड़ी है। यह हालत तब है जबकि बरसात शुरू हो गई है। जाहिर है कि अभी तक न तो नालियों और कुओं में क्लोरीन का छिड़काव किया गया और न ही क्लोरीन की गोलियां बांटी गई हैं। स्वास्थ्य के प्रति इस उदासीनता के चलते योजना परवान ही नहीं चढ़ पा रही है।
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अब आशा और प्रधान के खाते में जाएगा पैसा
जौनपुर। बारिश के समय में लोगों को संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए सफाई कराने, जलभराव वाली जगहों पर कीटनाशक दवाएं छिड़कवाने, ब्लीचिंग पाउडर, क्लोरीन की गोलियों के वितरण के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक राजस्व गावों में धनराशि अब तक एएनएम और ग्राम प्रधान के संयुक्त खाते में भेजी जाती थी। पर उनकी उदासीनता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने इस साल से यह धनराशि ग्राम प्रधान व आशा कार्यकर्ता के संयुक्त खाते में भेजने की योजना बनाई है।
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एनआरएचएम के तहत भेजी गई धनराशि खर्च नहीं होने की दशा में ग्राम प्रधान व एएनएम के संयुक्त खाते में पड़ी रहती है। जितनी धनराशि बची रहती है। उसे घटाकर शेष धनराशि खाते में फिर भेज दी जाती है।पैसा खर्च नहीं हो पाने को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने अब यह धनराशि आशा कार्यकर्ता व ग्राम प्रधानके संयुक्त खाते में भेजने का निर्णय लिया है। जिससे पैसा खर्च हो सके।
डा. रामजी पांडेय
मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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