जाफराबाद(जौनपुर)। राजमार्ग पर होने वाले हादसों के शिकार व्यक्ति को जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने के लिए लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग पर हौज गांव में बना ट्रामा सेंटर अव्यवस्था का शिकार है। यहां करोड़ों रुपये के मशीनें डिब्बे में बंद हैं।
वर्ष 2010 में करोड़ों रुपये की लागत से ट्रामा सेंटर बनाया गया था। इसमें तीन मेडिकल अफसर, दो एक्स-रे टेक्नीशियन, एक लैब टेक्नीशियन, 10 स्टाफ नर्स , 9 नर्सिंग सहायक, 8 मल्टी टास्क वर्कर की तैनाती की गई है लेकिन यहां सफाई कर्मचारी और फार्मासिस्ट की तैनाती ही नहीं की गई। सीटी स्कैन मशीन डब्बे में पैक है। उसे लगाने की जगह ही नहीं है और न ही उसके लिहाज से बिजली की व्यवस्था है।
लखनऊ से वाराणसी के बीच में ट्रामा सेंटर को आपातकालीन स्थितियों के लिए बनाया गया था। विभागीय उदासीनता के चलते इसका गुलाबी भवन बेकार पड़ा है। वर्ष 2016 के बाद लोगों ने कई बार अफसरों को पत्र लिखे। इसके बाद जाकर ट्रामा सेंटर में चिकित्सा व्यवस्था शुरू हुई। मगर यह पूरी तरह ट्रामा सेंटर के रूप में विकसित नहीं हो पाया। सीटी स्कैन मशीन पिछले दो माह से डिब्बे में पैक कर रखी हुई है। सिटी स्कैन उपकरण की कीमत करोड़ों रुपए से अधिक की बताई जा रही है। जनपद में इतने अत्याधुनिक उपकरण अभी तक अन्य सरकारी अस्पतालों में नहीं लगाए गए हैैं। उपकरण ट्रामा सेंटर में शोपीस के रूप में रखे गए हैं। ट्रामा सेंटर सुचारु रुप से संचालन कर दिया जाए तो दुर्घटना वाले मरीजों को अच्छी उपचार व्यवस्था मिल सकती है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. रामजी पांडे.य ने बताया कि सीटी स्कैन मशीन को लगाने के लिए 840 वर्ग फीट के कक्ष की जरूरत है, जो सेंटर में उपलब्ध नहीं है। उसके लिए 150 किलो वाट विद्युत कनेक्शन भी चाहिए, जिसके लिए जनरेटर लगाया जाना है। ट्रामा सेंटर में मशीन को चलाने के लिए विद्युत सप्लाई तथा कक्ष निर्माण के लिए शासन से मांग की गई है। बजट मिलने पर काम शुरू करा दिया जाएगा।