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गोमती नदी में गिरता शहर के 21 नालों का पानी

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नाला बनी गोमती
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जौनपुर। गोमती नदी का पानी जहर बन गया है। नदी में प्रदूषण इस कदर फैला है कि आम आदमी नदी का पानी हाथ से भी छूना नहीं चाहता। नदी के किनारे के गांवों में कैंसर जैसी बीमारियां पांव पसार रही है। शहर के 21 नालों का पानी नदी में बह रहा है। जिसकी वजह से पूरी नदी प्रदूषण से कराह रही है।
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गोमती नदी अस्वस्थ हो चुकी है। कुछ प्रकृति ने इसके जल में विष घोल दिए हैं और कुछ लोगों ने केमिकल युक्त पानी बहाकर नदी के पानी को विषैला बना दिया है। प्रतिदिन तकरीबन 40 एमएलडी गंदा जल हनुमान घाट, तूतीपुर, मियांपुर, बदलापुर पड़ाव से नदी में बह रहा है। सबसे खराब स्थिति हनुमान घाट की है। यहां सोनार मंडी का केमिकल युक्त पानी नदी में गिरने से पूरा पानी जहरीला हो गया है। लोगों के घरों का गंदा पानी, नगर पालिका का कूड़ा करकट भी नदी में बह रहा है। सिर्फ सरकार से गोमती नदी की सफाई की उम्मीद नहीं की जा सकती। सरकार तो उद्योगों का कचरा नदी में बहाने से नहीं रूकवा पा रही है। कहने के लिए सीवेज ट्रीटमेँट प्लाज गोमती नदी के किनारे लगा जरूर लेकिन एक दिन भी काम नहीं किया। नदी के किनारे बसे हजारों गांवों के लाखों लोग खुले में ही शौच नदी के किनारे कर रहे हैं। आवश्यकता है समय रहते गोमती के जल को अधिक अशुद्घ होने से बचाने की। इसके लिए कुछ संस्थाएं जनमानस में जागरूकता पैदा जरूर कर रही है लेकिन इसका कुछ खास असर लोगों पर नहीं पड़ रहा है। ऐसे में पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, साधु समाज, स्कूली बच्चों सहित समाज के हर तबके को आगे आना होगा। तभी गोमती को उसका पुराना स्वरूप देकर उसकी व्यथा को हर सकेंगे।


कागजों में बना जलनिगम का प्लान
जौनपुर। प्रदेश के नगर विकास राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव सदर से विधायक हैं। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने नदी को लेकर बहुत सारे वादे किए लेकिन उनके वादे सिर्फ हवाहवाई ही साबित हो रहे हैं। कहने के लिए तो कागजों में जल निगम ने प्लान तैयार किया है। कई लोगों ने प्रोजेक्ट भी बनाया है। गोमती एक्शन प्लान के तहत प्रोजेक्ट स्वच्छ गोमती अभियान ने तैयार कराया है। लेकिन इसे अमली जामा नहीं पहनाया जा सका है।
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