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अतिक्रमण से कराह रही है गोमती नदी

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जौनपुर। गोमती नदी के किनारे लोग कब्जा कर कालोनियों बसा रहे हैं। नदी की जमीन पर कब्जा करने की होड़ मची हुई है। प्रशासनिक अफसर भी चुप्पी साधे बैठें है। आए दिन हर शिकायतों के बाद भी नदी की भूमि की पैमाइश कई सालों बाद भी नहीं हुई। जिसकी वजह से कलीचाबाद से रामघाट पचहटिया तक नदी की 200 एकड़ से अधिक जमींन पर लोगों ने कब्जा कर लिया है। कई लोगों ने तो स्कूल , कालेज भी खोल लिया है।
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जिस गोमती नदी के तट पर भगवान बुद्ध ने विश्राम किया था। आज लोग उन्हीं घाटों को कब्जा करने में जुट गए हैं। गोमती नदी जिले के सिंगरामऊ इलाके में प्रवेश कर बदलापुर, जौनपुर जलालपुर, केराकत होते गाजीपुर जिले में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। जौनपुर में नदी के दोनों किनारे शहर बसा हुआ है। नदी में तेजी से पानी का जलस्तर नीचे खिसकने की वजह से नदी सूख गई है। इसका लाभ उठाते हुए लोगों ने नदी की जमींन पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। तेजी से स्कूल, कालेज, मकान बनाएं जा रहे है। कुछ लोग तो शौचालय नदी के किनारे बनाकर गंदा पानी नदी में बहा रहे है। देखा जाए तो कटघरा इलाके में तो पूरी कालोनी ही नदी की जमींन पर बसा दी गई है। कब्जा करने की होड़ एवं अतिक्रमण से नदी कराह रही है। गोमती के ऊपरी जलधारा में स्थित नगर सीमा कलीचबाद से नदी की निचली जलधारा के नगर की सीमा रामघाट तक लोगों ने नदी के दोनों छोर पर कब्जा जमा लिया है। कलीचबाद और पंचहटियां में स्कूल खोल दिए गए है। अवैध कालोनी , मकान ,तुतीपुर ( तड़ताल) में घाट के समीप लोग बनाने में जुटे है। शाही पुल के पंचतखे से गूलरघाट के बीच ( पश्चिमदिशा) में लोगों ने नदी की जलधारा को अवरुद्ध करते हुए नदी के बीच मकान बना लिया है। जिसके फल स्वरूप पिछले दो दशकों से ऐतिहासिक मुगलकालीन पंचतखें से नदी का प्रवाह पूर्णतया बंद हो गया है। जिससे शाही पुल के हिस्से का अस्तित्व ही संकट में पड़ गया है। आगे बढ़ने पर केरारबीर मंदिर से बलुआ घाट तक नदी के किनारों को तेजी से कब्जा कर मकान बनाएं जा रहे है। जोगियापुर मोहल्ले में भी धीरे धीरे नदी के किनारे अस्थाई निर्माण करना शुरू कर दिया है। कमोबेश ऐसी स्थिति निचली जलधारा में स्थित अचला देवी घाट, मिंयापुर, और सूरजघाट के आस पास क्षेत्र में भी है। स्वच्छ गोमती अभियान के संरक्षक पूरे मामले में कहीं न कही प्रशासनिक अधिकारियों की मिली भगत की वजह से कब्जा करने की होड़ मची हुई है। अगर ऐसा नहीं रहता तो साठ गांठ कर नक्शे पास नहीं होते। यही नहीं शिकायत के बाद नदी की पैमाइश कराई जाती। जिससे नदी का दायरा कब्जा होने से बच जाता।
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नदी की भूमि पर कब्जा करने की कोई शिकायत मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो शिकायत मिलने पर पैमाइश कराकर कब्जा हटवाया जाएगा।
अरविंद मलप्पा बंगारी
डीएम
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