जौनपुर। कलेक्ट्रेट स्थित माल अभिलेखागार की स्थिति काफी खराब है। जहां पुराने अभिलेखों का कोई ब्यौरा मौजूद नहीं है। वहीं कर्मचारियों की मनमानी लोगों पर भारी पड़ रही है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि 500 से 1000 लेकर नकल दिया जाता और सिर्फ पत्रावली देखने का 100 से 200 रूपए की डिमांड की जाती है। अदालती व्यवस्था में पत्रावली देखने का कोई शुल्क नहीं है। बावजूद इसका पालन नहीं हो रहा है। अफसर भी अभिलेखागार का मुआयना करने में घबड़ा रहे हैं। जिसकी वजह से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। अभिलेखागार में जमीन, खसरा, खतौनी, बंदोबस्त, चकबंदी सहित जिले का महत्वपूूर्ण रिकार्ड रखा गया है। लेकिन सूत्रों की माने तो कुछ बिचौलियों ने महत्वपूर्ण रिकार्ड को इधर-उधर करा दिया है। यही वजह है कि पत्रावलियों का कोई ब्यौरा नहीं मिलता। और तो और अधिवक्ताओं को मुआयना करने के दौरान बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। अधिवक्ताओं को घंटों खड़ा रहना पड़ता है। कलेक्ट्रेट अधिवक्ता समिति के अध्यक्ष विजय प्रताप सिंह, महामंत्री ओम प्रकाश सिंह का कहना है कि इस संबंध में डीएम को कई बार अवगत कराया गया। लेकिन कोई जांच पड़ताल नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि मुकदमों में स्वत: पत्रावली को भेजा जाना चाहिए। लेकिन बिना सुविधा शुल्क जमा किए पत्रावलियां नहीं आती। जिससे अधिवक्ताओं में आक्रोश है। उधर डीएम अरविंद मलप्पा बंगारी का कहना है कि अभिलेखों का ब्यौरा नहीं होने की जानकारी उन्हें किसी ने नहीं दिया है। अगर ऐसा है तो गंभीर मामला है। प्रकरण सामने आने के बाद जांच होगी।