जौनपुर। किसान सावधानी रख धान की नर्सरी को रोगों से बचा सकते हैं। धान की नर्सरी को डालने से पहले बीज का शोधन कर लेना चाहिए। इससे नर्सरी में रोगों का कम प्रभाव होता है। धान की नर्सरी में सफेदा व खैरा रोग लगता है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार राय ने बताया कि किसान खरीफ फसलों की बुवाई करने से पूर्व ट्राइकोडर्मा आठ ग्राम प्रति किग्रा बीज, कार्बेंडाजिम 2.5 ग्राम प्रति किग्रा बीज और थीरम तीन ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से बीज शोधन अवश्य करें। बीज शोधन करने से कम खर्च में ही बीज जनित रोगों से पूर्णतया निजात मिल जाती हैं। वर्तमान समय में धान की नर्सरी में लगने वाले रोगों को सावधानी रख बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि धान की नर्सरी में सफेदा रोग लौह तत्व की अनुपलब्धता के कारण लगता है। नई पत्ती सफेद रंग की निकलती है जो कागज के समान होकर फट जाती है। इसके उपचार हेतु फेरस सल्फेट पांच ग्राम व 20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर दो से तीन छिड़काव पांच दिन के अंतर पर करें। धान की नर्सरी में खैरा रोग जस्ते की कमी के कारण होता है। इसमें पत्तियॉ पीली पड़ जाती हैं। जिस पर बाद में कत्थई रंग के धब्बे पड़ जाते हैं। इसके उपचार हेतु किसानों को जिंक सल्फेट पांच ग्राम व 20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए।