जौनपुर। शहर में जगह-जगह रोजा इफ्तार आयोजन किया गया। इसमें मुल्क के अमन चैन की दुआ मांगी गई। अकीदतमंदों ने कहा कि रोजा इफ्तार से सामाजिक सौहार्द बढ़ता है।
अवकाश प्राप्त मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जीएच खान द्वारा रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया। मौलाना अनवार, मौलाना जावेद, डा. शकील, साजिद हमीद, जवैद, सोहराब, डा. युसूफ, डा. सैफ, डा. फैज, डा. मोहसिन, डा. सलीम, प्यारे लाल सोनकर, पीयूष श्रीवास्तव, सर्वेश सिंह, शिक्षक मो. अब्बास मौजूद रहे। बाजार भुआ पुरानीबाजार की मस्जिद अल-मुस्तफा में शिया इंटर कालेज के प्रधानाचार्य डा. अलमदार नजर की ओर से आयोजित इफ्तार में मौलाना वसी मोहम्मद ने नमाज पढ़ाई। प्रबंधक नजमुल हसन नजमी, प्रधानाचार्य डा. नासिर खान , लाल चंद सैनिक, श्याम कुमार सिंह,आरिफ हबीब, अनवर जमाल,अफसर अनमोल, राजेन्द्र सोनकर, सय्यद मोहम्मद हसन,आजम खां, जाकिर वास्ती, ग़ुलाम मेहदी बिल्लू ,दानिश काजमी, समीर अली,असग़र मेहदी, जमीरुल हसन ,रजा खां, हसन सईद, मसूदूल हसन, इमरान जैदी,कुमैल हैदर , आरिफ हुसैनी ,तहसीन शाहिद, अंजुम सईद,लड्डन भाई, अलमदार रिजवी, मौलाना दिलशाद हुसैन, मौलाना सरवत हुसैन,आसिफ़ जमील, अहमद नदीम मौजूद रहे।
मछलीशहर। रमजान माह को तीन भागों में बांटकर इसमें इबादत करने की व्यवस्था बनाई गई है। रमजान के शुरुआती आशरा रहमत, दूसरा आशरा बरकत और तीसरा जहन्नुम से आजादी का होता है। एक आशरा दस दिन का होता है। यह बात नगर वाली पक्की मस्जिद के इमाम मौलाना जलालुद्दीन ने मंगलवार को तकरीत में कही।
उन्होंने कहा कि आखिरी अशरे को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। यह जहन्नुम से आजादी का अशरा है। रमजान के दौरान एक रात की इबादत हजार माह की इबादत से बढ़कर होती है। आखिरी अशरे में एतिकाफ करने या घर बार छोड़कर पूरी रात इबादत करनी चाहिए। कुरान पाक की तिलावत, अल्लाह का जिक्र व तरावीह के साथ नफिल इबादत करनी चाहिए। एतिकाफ में इलाके के किसी एक शख्स के शामिल होने से पूरी इलाका ही शमिल हो जाता है। रमजान का एक माह पूरी जिंदगी के लिए मार्गदर्शन है। ये हमे त्याग, सहनशीलता, सहिष्णुता और बुराई से बचाने का प्रशिक्षण देता है। 0