जौनपुर। सिंचाई विभाग ने सफाई के नाम पर नहरों में पानी नहीं छोड़ा, जिससे किसान नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। अब विभाग का कहना है कि इस साल खरीफ के बुवाई से पहले नहरों की सफाई नहीं कराई जाएगी। साल में केवल एक बार इससे टेल तक पानी पहुंचने में संशय उत्पन्न हो गया है और खरीफ की खेती प्रभावित होने की आशंका पैदा हो गई है। खरीफ और रबी के बीच ज्यादा समय नहीं होता है, जिससे नहरों की सफाई भी ठीक से नहीं हो पाएगी। सिंचाई विभाग हर साल खरीफ के फसलों की बुआई होने से पहले नहरों की सफाई कराता रहा है। इस साल सफाई के नाम पर नहरों में धान की नर्सरी के लिए पानी नहीं छोड़ा जा रहा था और विभाग नहरों की सफाई भी नहीं करा रहा था। रबी और खरीफ के फसलों की बुआई से पहले साल में दो बार नहरों की सफाई और मरम्मत की जाती थी। अबकी बार शासन ने नहरों की सफाई के लिए धन भेजने के बजाय आदेश जारी कर दिया कि साल में केवल रबी की बुवाई के पहले ही नहरों की सफाई की जाएगी। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान है, जिससे पर्याप्त पानी की जरूरत होती है। आमतौर पर नहरों के टेल तक पानी पहुंचना मुश्किल होता है। सफाई नहीं होने से इस बात का संशय है कि नहर के टेल तक पानी पहुंचे। किसानों की चिंता यह है कि वे किसी तरह घान की बेहन डाल भी लें तो बुवाई के समय पता नहीं पानी मिले या न मिले। सिंचाई की व्यवस्था नहीं होने पर बीज और खाद बरबाद होगी। जायद की खेती आमतौर पर इलाके में नहीं होती है। ऐसे में रबी की कटाई और खरीफ की बुवाई के बीच ज्यादा अंतर होता है। मगर खरीफ की कटाई के तुरंत बाद ही रबी की बुवाई शुरू हो जाती है। ऐसे में नहरों की सफाई का पर्याप्त वक्त भी नहीं मिल पाएगा, जिससे उसकी सिंचाई भी प्रभावित होगी।
जिले में कुल 343 नहरें हैं, जिनकी लंबाई जो 1705 किलोमीटर है। इससे 39हजार 923 हेक्टेयर खेतों की सिंचाई की जाती है। मई माह से लेकर मध्य जून तक नहरें भी बंद है। इस साल दो लाख 29 हजार हेक्टेयर में खरीफ की खेती का लक्ष्य है। सिंचाई विभाग की लापरवाही के चलते यह पूरा होता नहीं दिख रहा है।
मांगा 1100 क्यूसेक पानी
जौनपुर। फसलों की सिंचाई कार्य के लिए 1100 क्यूसेक पानी की जरूरत है। इसके लिए सिंचाई विभाग ने शासन को पत्र भेजा है। हालांकि किसी साल जरूरत भर का पानी नहीं मिल पाता है। हर साल औसतन 700 क्यूसेक पानी की आपूर्ति ही नहरों के जरिए होती है। मगर इस वर्ष नहरों की सफाई नहीं होने के कारण काफी पानी बरबाद होने की आशंका पैदा हो गई है।
नहरों की सफाई के लिए शासन ने बजट नहीं दिया। नया शासनादेश आया है, जिसमें कहा गया है कि अब केवल रबी की बुवाई से पहले नहरों की सफाई की जाएगी। इसके कारण नहरों की सफाई नहीं कराई गई है। 10 दिनों के बाद नहरों में पानी आ जाएगा।-आशीष कुमार कुशवाहा, अधिशासी अभियंता, सिंचाई