वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे बैंक कर्मचारियों ने दूसरे दिन गुरुवार को भी प्रदर्शन कर नारेबाजी की। सरकारी और निजी क्षेत्र के 13 बैंकों की 197 शाखाओं में से किसी भी बैंक के ताले नहीं खुले। अधिकतर एटीएम के शटर भी बंद रहे। जहां तहां एटीएम खुले रहे तो उसमें पैसे ही नहीं थे। लोगों को कैश के लिए परेशान होना पड़ा। बैंकों की हड़ताल से दो दिनों में करीब पांच अरब का कारोबार प्रभावित हुए। डेढ़ सौ करोड़ के चेक क्लीयरेंस में फंसे हैं। बैंकों की हड़ताल का असर थोक आढ़तियों के यहां भी दिखा। बाहर से आने वाल वाहक ट्रकें मंडी में नहीं पहुंची।
बैंकों की हड़ताल के चलते कारोबार प्रभावित हुआ है। गल्ला मंडियों में बाहर से आने वाले मालवाहक ट्रक नहीं आए। अनुमान लगाया जा रहा है कि एक दिन में करीब दो अरब से अधिक का कारोबार प्रभावित रहा। दो दिनों में पांच अरब का नुकसान हुआ है। करीब 70 करोड़ के चेकों का क्लीयरेंस बैंकों में फंसा है। दो दिनों की हडताल में डेढ़ सौ करोड़ का चेक फंसा है। बाहर के माल मंगाने के लिए व्यापारी बैंकों से आरटीजीएस नहीं कर सके। इसी का नतीजा रहा कि जिले की प्रमुख गल्ला मंडी शाहगंज, नगर में सुतहट्टी, अलफस्टीनगंज में आढ़तियों के यहां सन्नाटा पसरा रहा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन्स के जिला मंत्री आरपी सिंह ने कहा कि वेतन वृद्धि को लेकर भारतीय बैंक संघ उदासीन एवं नकारात्मक रवैये के कारण बैंक कर्मचारियों व अधिकारियों में गुस्सा है। बैंकों की आर्थिक दशा बद से बदतर होती जा रही है। प्रदर्शन कर रहे बैंक कर्मचारियों ने कहा कि नोटबंदी के समय में वे 18 से 20 घंटे तक की ड्यूटी किए। सरकार का पूरा सहयोग किया लेकिन जो मांग उनकी 2017 में पूरी हो जानी चाहिए थी वह अभी तक नहीं हो सकी। प्रदर्शन करने वालों में अशोक शुक्ल, तान्या शर्मा, रश्मि करन, मनीष कुमार, नीरज सिंह, वीपी श्रीवास्तव, अशोक शर्मा, संजय पांडेय, दुष्यंत कुमार, कृष्णा यादव आदि मौैजूद थे।