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बिल्डिंग मैटेरियल के दाम आसमान पर, ठप हुए निर्माण कार्य

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जौनपुर। गिट्टी और बालू की कीमतें बढ़ने के कारण प्रधानमंत्री आवास योजना के घर और स्वच्छता अभियान के तहत शौचालय बनवाना मुश्किल हो गया है। इन योजनाओं के तहत निर्माण की लिए निर्धारित रकम दी जाती है जबकि भवन निर्माण सामग्री की कीमतें डेढ़ गुना तक बढ़ गई हैं। इससे काम ठप हो गया है और मजदूरों के सामने भी रोजगार का संकट पैदा हो गया है।
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दस रोज पहले 55-60 रुपये घन फुट की दर से बिकने वाली मोरंग 85 रुपये घन फुट के भाव हो गई है। इस तरह गिट्टी के दाम भी 90 से 95 रुपए प्रति घन फुट हो गया है। सीमेंट और ईंट के दामों राहत में हैं। मोरंग बालू , सफेद बालू और गिट्टी के रेट में हर रोज 4-5 रुपए वर्ग फुट की दर से बढ़ोतरी हो रही है। जिले में 20 हजार 138 प्रधानमंत्री आवास बनाए जाने हैं। महंगाई की वजह से आधे से अधिक लोग आवास नहीं बनवा पा रहे हैं। सरकारी धन उनके खाते में पड़ा है लेकिन वह निर्माण कार्य की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। भवन निर्माण सामग्री के कारोबारियों का कहना है कि ओवरलोडिंग में परिवहन विभाग ने छूट दी थी, जिसके चलते मोरंग और गिट्टी की कीमतें कम हुई थीं। इधर 10 दिनों से परिवहन विभाग ने अभियान चलाकर ओवरलोड गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। इसके चलते सोनभद्र, मध्य प्रदेश से मोरंग और गिट्टी की आवक कम हो गई है। रोजाना तेल की बढ़ती कीमतों के चलते भी ट्रांसपोर्टर गिट्टी बालू ले जाना नहीं चाहते हैं।
सरकारी दर के मुताबिक मोरंग 48 रुपए और गिट्टी 82 रुपये घन फुट की दर से मिलना चाहिए। सीमेंट की दर 230 रुपये बोरी, ईंट 5500 रुपए प्रति हजार तय की गई है। इस हिसाब से सीमेंट 100 रुपये महंगी बिक रही है। निर्माण कार्य घटने से ईंटों की कीमतें जरूर नियंत्रित हैं। मजदूर विकास यादव का कहना है कि निर्माण कार्य ठप होने से मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट भी पैदा हो गया है। निर्माण क्षत्र में रोजाना तकरीबन चार हजार मजदूरों को काम मिलता है लेकिन आजकल 2500 लोग ही काम पा रहे हैं। अन्य को लौटना पड़ रहा है।
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जौनपुर। परिवहन विभाग और ट्रक मालिकों के बीच अच्छी सेटिंग है। दलालों के माध्यम से एक हजार रूपए प्रति ट्रक परिवहन विभाग को ओवरलोड करने वाले देते हैं। यह खेल कई महीनों से चल रही है। जिसकी सेटिंग नहीं हो पाती। उसकी गाड़ियां सिकरारा क्षेत्र के कुछ माफिया एक हजार रूपया लेकर ओवरलोड ट्रकों को पार कराते हैं। जौनपुर होकर हर रोज 500 से अधिक ओवरलोड ट्रक गुजरते हैं। इधर शासन की शक्ति के बाद धरपकड़ इलाहाबाद, मिर्जापुर सहित अन्य जनपदों में शुरू हुई है। जिसका असर जौनपुर पर भी पड़ा है।
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