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एआरटीओ से जुड़े फर्जीवाड़े की जांच कराने का एसपी को आदेश

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जौनपुर। कोतवाली थाना क्षेत्र के एआरटीओ ऑफिस से जुड़े फर्जीवाड़े के मामले में सीजेएम ने पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया कि कोतवाल से मामले की जांच कराकर बिंदुवार आख्या कोर्ट में पेश करें। पूर्व में कोर्ट ने स्कूल प्रबंधक और एआरटीओ बाबू समेत चार के खिलाफ दायर धोखाधड़ी, जालसाजी के केस में वाद दर्ज कर कोतवाल को जांच का आदेश दिया था लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ।
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योगेंद्र प्रसाद निवासी प्रेमापुर गौराबादशाहपुर ने कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत प्रार्थनापत्र दिया था कि उसने महिंद्रा जाइलो और मैक्सिमो खरीदा। एक गाड़ी 15000 रुपए भाड़े पर स्कूल प्रबंधक सुनील को बच्चों को लाने और ले जाने के लिए दिया। दूसरी गाड़ी सुनील के धरनीधरपुर कोतवाली स्थित आरओ प्लांट पर घर-घर आरओ पानी पहुंचाने के लिए 10,000 रुपए भाड़े पर दिया। दोनों गाड़ियां आरोपी ने गायब कर दिया। भाड़े का रुपया भी हड़प लिया। पता चला कि आरोपी सुनील, एआरटीओ के बाबू और अन्य आरोपियों की साजिश से फर्जी एनओसी व अन्य कागजात तैयार कराकर गाड़ी गबन करके बेच दिया। फर्जी कागजात के जरिए गाड़ी बेचने का गोरखधंधा करने वाला एक बड़ा गिरोह पूरे पूर्वांचल में सक्रिय है। 12 मार्च 2018 को जब वादी आरोपी सुनील से उसके आरओ प्लांट पर अपनी गाड़ी के बाबत पूछताछ करने गया तो उसने बताया कि वह एआरटीओ कार्यालय के बाबू से और अन्य आरोपियों से मिलकर दोनों गाड़ियां बेच दी। कहासुनी होने पर उसके साथ उपस्थित अज्ञात व्यक्तियों ने वादी को मारापीटा। गालियां और धमकी देकर भगा दिया। गाड़ियों का पता नहीं चला। थाना और पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई सुनवाई नहीं हुई।
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