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परमात्मा को पाने का साधन है प्रेम भाव

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सुजानगंज। क्षेत्र के तिलहरा में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन शनिवार को पंडित श्री आशीष कृष्ण शास्त्री जी महाराज जी ने अरिष्टासुर, केशी उद्धार, कंश बध आदि का वर्णन प्रवचन के माध्यम से किया। उन्होंने उद्धव के चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि परमात्मा को पाने के लिए सबसे सरल साधन प्रेम भाव है। क्योंकि भगवान ने यह खुद कहा है कि भाव का भूखा हुं मैं तो भाव ही एक सार है, भाव से मुझको भजे तो भव से बेड़ा पार है ।भाव बिना कुछ दे तो मैं कभी लेता नही ,भाव से भी एक फूल दे तो वो मुझे स्वीकार है।उन्होंने बताया कि उद्धव जी ज्ञान के बड़े अहंकार से वृंदावन गए थे। लेकिन वहाँ जाने के बाद गोपियों को देखकर उनका सारा ज्ञान धरा का धरा राह गया। जब छ: महीने बाद लौटे तो ज्ञानी उद्धव नहीं प्रेमी उद्धव बनकर लौटे । इस दौरान रुकमणी और कृष्ण के विवाह की भव्य झांकी देख श्रद्घालु झूम उठे।
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