सुजानगंज। तिलहरा ग्राम में स्थित झाली भवानी मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस में पंडित आशीष कृष्ण शास्त्री ने वामन अवतार, समुद्र मंथन, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। महराज ने कहा कि मनुष्य जितना समय अपने परिवार के भरण पोषण और स्वयं के संवारने में लगाता है, उससे कम समय यदि परमात्मा के स्मरण में लगा दें तो उसका उद्धार हो जाए।
उन्होंने बताया कि त्रिकूट पर्वत पर एक गज अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। एक दिन जल पीने कि इच्छा से वह एक सरोवर पर गया अपने परिवार के साथ जल पीते पीते जल क्रीड़ा करने लगा, उसी समय एक जंतु आकर उस गजराज का पैर पकड़ लिया तो वह अपने परिवार को पुकारने लगा पर परिवार के लोगों ने देखा कि गजराज नहीं बचने वाले तो सब वहां से चले गए। तब गजराज को परमात्मा की याद आई और अंत में गोविंद को याद किया। तब परमात्मा आए और गजराज के प्राणों की रक्षा की। महाराज जी ने कहा कि इसीलिए परिवार के साथ भी रहे तो परमात्मा को भूले नहीं क्योंकि परमात्मा ही हमारा सच्चा साथी है। जब कोई साथ नहीं देता तब परमात्मा साथ देते हैं। इस मौके पर मोहित शुक्ला, दीपक, अखिलेश, शिवेंद्र शुक्ला, घनश्याम आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।