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10 साल के अदनान ने रखा रोजा

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जौनपुर। मुकद्दस माह रमजान का रोजा रखने में बच्चे भी पीछे नहीं है। दस साल के बालक अदनान ने भी रोजा रखा है। अदनान नगर के मीरमस्त मोहल्ला निवासी शकील मंसूरी के बेटे हैं। इस वर्ष रमजान का रोजा करीब 15 घंटे का हो रहा है। मदरसे में मौलाना की तकरीर और घर में रोजा रख रहे परिवार के अन्य सदस्यों से प्रेरित होकर अदनान ने खुदा की इबादत के लिए रोजा रखने का फैसला किया तो घर वाले हैरान हो गए। पहले तो परिवार वालों ने बच्चे को रोजा रखने से मना किया लेकिन उसकी जिद पर परिवार वालों को भी मानना पड़ा। दोपहर बाद अदनान की दशा देख मां ने उसे रोजा तोड़ देने को कहा लेकिन वह नहीं माना। जैसे तैसे शाम हुई और इफ्तार का समय हुआ तो मां ने अपने हाथों से पकवान बनाकर बेटे को इफ्तार कराया। वैसे तो इस महीने में रोजा रखना हर बालिग पर फर्ज है लेकिन कोई बच्चा रोजा रखे तो किसी हैरत से कम नहीं है। वैसे तो रोजा रखना किसी के लिए भी आसान नहीं होता लेकिन अदनान के लिए यह मश्किल भी नहीं रहा। अदनान को पता है कि रोजा में नेकी और कामयाबी का राज छिपा है। बरकत के इस महीने में रोजा रखने से हमदर्दी और इंसानियत का जज्बा भी बढ़ता है।
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मछलीशहर/जफराबाद। मस्जिद में नमाज अता करने के दौरान लोगों से रमजान महीने में रोजा रखने से होने वाले फायदे को सुनकर प्रेरित होकर नगर के महतवना मोहल्ला नविासी नवील रब्बानी (12) ने पहला रोजा शुरू किया। वह सेंट जोसेफ स्कूल में कक्षा 6 का छात्र है। पहली बार रोजा रहकर अल्लाह की इबादत आरम्भ किया है। पिता कौसर रब्बानी बताते है कि कम उम्र और गर्मी को देखतेे हुए रोजा रखने से मना किया मगर बच्चे की इच्छा को देखते हुए दबाव नहीं दे सके। उधर जफराबाद: क्षेत्र के कल्याणपुर निवासी मोहम्मद जावेद ने अपना पहला रोजा रखा और अल्लाह से दुआ मांगी। कहा कि हमें अल्लाह नेक रास्ते पर चलने की तौफीक अता फरमाए। जावेद ने बताया कि पहला रोजा रखकर हमें बहुत अच्छा लग रहा है। हम अपने दादा-दादी, अम्मा, अब्बू के वास्ते रोजा रखकर उनके लिए दुआ मांगी की अल्लाह सभी को सुखी रखें।
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