जौनपुर। इस समय धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो गया है। 15 मई से 20 जून तक धान की नर्सरी डालने का उचित समय माना जाता है।
नहरों में पानी नहीं रहने से लगभग पांच लाख 25 हजार किसान नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। सिंचाई विभाग सिल्ट की सफाई का बहाना बना रहा है।
जिले में कुल छह लाख 55 हजार किसानों की जीविका दो लाख 28 हजार हेक्टेयर भूमि में खेती से चलती है। पांच लाख 25 हजार किसानों की 1.54 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई नहरों पर निर्भर है। जिले में 1705 किलोमीटर लंबी नहरों का जाल है। नहरों में पानी नहीं रहने से इन किसानों को धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। कुछ किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों से किसी तरह नर्सरी डाल पा रहे हैं लेकिन अधिकांश किसान संसाधनों के अभाव के कारण धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। सिल्ट की सफाई के कारण 26 अप्रैल से 13 जून तक नहरों को बंद कर दिया है, जिससे पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। मछलीशहर क्षेत्र में नहर की शाखाओं में पानी नहीं आने से धान की नर्सरी का काम बाधित है। शारदा सहायक खंड 39 की कई शाखाओं में पानी नहीं है। जिन किसानों के पास पम्पिंग सेट की सुविधा है वे नर्सरी डालने की तैयारी में जुट गए हैं। परंतु जो किसान नहर के पानी के भरोसे है। वे नहरों में पानी नहीं आने के कारण धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। मुफ्तीगंज में इन दिनों किसान स्वर्णा व सम्भा प्रजाति के धान की नर्सरी डालते हैं लेकिन शारदा सहायक खंड 36 के में पानी ही नहीं है। पतौरा,बग्थरी, मुरार, मल्लूपुर बगही, सराव ,अमरा असवारा , पिलखिनी के किसानों ने अविलंब नहर में पानी छोड़ने की मांग की है ।
इस समय सिल्ट सफाई का कार्य चल रहा है। जिससे 26 अप्रैल से लेकर 13 जून तक नहरों में पानी बंद कर दिया गया है। बंदी का समय समाप्त होने के बाद ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।-आशीष कुशवाहा, अधिशासी अभियंता सिंचाई