जौनपुर। बक्शा थाना क्षेत्र के सरौली गांव में विवाहिता को जलाकर मारने के आरोपी पति को अपर सत्र न्यायाधीश ईसी एक्ट मनोज कुमार सिंह गौतम ने मृत्युदंड की सजा सुनाई है। उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माने की आधी रकम मृतका की पुत्री को देने का आदेश दिया है।
सिकरारा थाने के बथुआवर निवासी समरजीत ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी। उसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत में कहा था कि उनकी बहन सुषमा देवी की शादी 10 मई 2002 को सरौली निवासी मनोज कुमार के साथ हुई थी। विवाह के बाद उसे दो बच्चियां भी हुईं। पति दहेज में बाइक की मांग को लेकर सुषमा को प्रताड़ित करता था। 26 सितंबर 2012 की रात शराब पीकर आया। पत्नी से झगड़ने लगा तथा उस पर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। ससुराल वाले अस्पताल ले गए। उसने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दिया कि पति ने उसे जलाया था। इलाज के दौरान 6 अक्टूबर 2012 को सुषमा की मृत्यु हो गई। पुलिस ने पति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया। एडीजीसी संजय श्रीवास्तव ने 10 गवाहों को परीक्षित कराया। मृतका के भाई, मां व उसकी पुत्री मधु ने भी घटना की पुष्टि की। अभियुक्त ने तर्क दिया गया कि वह निर्दोष है। मृतका ने खुद को आग लगाकर जान दे दी थी। कोर्ट ने 23 पेज के फैसले में विधि व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए मामला विरल से विरलतम माना और अभियुक्त को मृत्युदंड की सजा सुनाई।
अब तक ग्यारह को हुई फांसी की सजा
जौनपुर। जनपद न्यायालय में अब तक दस आपराधिक मामलों में कोर्ट द्वारा ग्यारह अभियुक्तों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है, जिन मामलों में फांसी हुई उनमें श्रमजीवी विस्फोट कांड भी शामिल है।
वर्ष1982 में कोर्ट द्वारा मडियाहूं थाना क्षेत्र के रामपुर नद्दी गांव में कटहल तोड़ने के विवाद में भाई, भाभी और भतीजे की हत्या करने के आरोपी अभियुक्त लालचंद मिश्र को हुई फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट तक बहाल रही। उन्हें फांसी दी गई। वर्ष 1966 में अपर सत्र न्यायाधीश डंडले ने जफराबाद थाना क्षेत्र के तिहरे हत्याकांड के मामले में दोषी आरोपी रमाशंकर को फांसी की सजा सुनाई थी। इसके अलावा 1976 में अपर सत्र न्यायाधीश गोविंद प्रसाद ने मां, बहन और पिता को मौत के घाट उतारने और दो को घायल करने के जुर्म में दोषी आरोपी कोतवाली थाना क्षेत्र के स्वतंत्र कुमार बैंकर्स को फांसी की सजा सुुनाया था। 1978 में अपर सत्र न्यायाधीश केसी सक्सेना ने सिकराराशथाना क्षेत्र के बांकी गांव में हुए तिहरे हत्या कांड में फांसी की सजा सुनाया था। 1981 में अपर सत्र न्यायाधीश जीडी दुबे ने केराकत थाना क्षेत्र के पांच लोगों को मौत के घाट उतारने के मामले में आरोपी को फांसी की सजा सुनाई। 1984 में अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय ने सुजानगंज थाना क्षेत्र में परिवार के सभी सदस्यों की हत्या करने के दोषी आरोपी गोपाल को फांसी की सजा सुनाई थी। 1985 में अपर सत्र न्यायाधीश खरे ने तिहरे हत्याकांड में दोषी आरोपी को फांसी की सजा सुनाया था। 2009 में अपर सत्र न्यायाधीश राजेंद्र चंद्र की अदालत ने रामपुर थाना क्षेत्र के जमालपुर बाजार में वर्ष 1996 में हुए तिहरे हत्याकांड के दोषी आरोपी आलम सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी। 30 जुलाई 2016 अपर सत्र न्यायाधीश बुधिराम यादव की अदालत ने श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन बम विस्फोट कांड मामले के दोषी आरोपी बांग्लादेश निवासी मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी को फांसी की सजा सुनाई थी। अगस्त 2016 में श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन बम विस्फोट कांड मामले के दोषी दूसरे आरोपी बांग्लादेश निवासी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई को अपर सत्र न्यायाधीश बुधिराम यादव की अदालत ने फांसी की सजा सुनाया था।