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रमजान पर सजे बाजार

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रमजान माह की शुरुआत से साथ ही जरूरी सामान से बाजार सज गए हैं। बाजार में रोजेदारों से जुड़ी व जरूरी चीजें उपलब्ध हैं। हालांकि सहरी और इफ्तार करने वालों पर महंगाई का बोझ भी रहेगा। अधिकतर चीजों के दाम में पिछले साल के मुकाबले इजाफा हुआ है। खानेपीने की सामग्रियों से बाजार पटे पड़े हैं। हालांकि अभी खरीदार कम दिख रहे हैं।
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पवित्र रमजान में दिन भर उपवास रखकर रोजा रखने वाले लोग शाम को इफ्तार करते हैं। सहरी और इफ्तार में इस्तेमाल होने वाली खाद्य सामग्री बाकरखानी, शाही टुकड़ा, सीरमाल, फिन्नी, दूधफेनी, दहीबड़ा, बिरयानी, ठंडई, चना, मटर, बेसन आदि की कीमतों में पिछले साल के मुकाबले इजाफा हुआ है। रमजान में खासतौर से इस्तेमाल होने वाले खजूर के दाम बढ़े हैं। हालांकि खजूर की कुछ प्रजातियां सस्ती हुई हैं। सऊदी अरब से आने वाली खजूर की सभी प्रजातियों के दाम महंगे हुए हैं। जबकि ईरान से आने वाली खजूर इस साल सस्ती है। खजूर के थोक कारोबारी अलराइन खजूर के प्रोपेराइटर रईश राइनी के मुताबिक बाजार में इस साल 80 रुपये से लेकर 2000 रुपये प्रति किलो तक खजूर उपलब्ध है। सऊदी से आने वाला अजवा खजूर इस साल बाजार में दो हजार रुपये किलो की दर से बिक रही है। जबकि पिछले साल इसकी कीमत 1700 रुपये प्रति किलो थी। कलमी खजूर 600 रुपये किलो है, जबकि पिछले साल यह खजूर 550 रुपये किलो की दर से बिक रहा था। मारिया खजूर 350 रुपये किलो है और पिछले साल इसकी कीमत 300 रुपये थी। अंबर खजूर 400 रुपये किलो है जबकि पिछले साल इसकी कीमत 310 रुपये थी। पिछले साल गरी 120 रुपये से 125 रुपये में थी। इसकी कीमत इस साल 200 से 215 रुपये है। लावा की कीमत भी महंगी हुई है। पिछले साल लावा 350 रुपये से 400 रुपये किलो था। इस साल लावा 750 रुपये किलो से 800 रुपये किलो बिक रहा है। काजू और बादाम की कीमत में कोई अंतर नहीं आया है। हालांकि चीनी सस्ती हुई है। पिछले साल रमजान के महीने में चीनी 40 से 42 रुपये किलो बिक रही थी। इस साल चीनी की कीमत 30 से 32 रुपये किलो है। मटर पिछले साल 36 रुपये किलो थी इस साल 42 रुपये किलो बिक रही है। शकील मंसूरी, मो. ताबिस, रजा हैदर खान आदि रोजेदारों का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल सहरी और इफ्तार में इस्तेमाल होने वाली कई खाद्य सामग्रियों की कीमतों में इजाफा हुआ है लेकिन रोजा रखना है तो खरीददारी तो करनी ही पड़ेगी। किराना कारोबारी सलाउद्दीन कहते हैं कि नोटबंदी और जीएसटी की वजह से बाजार पर महंगाई का असर पड़ा है।

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माफी पाने का महीना है रमजान
अमर उजाला ब्यूरो
जौनपुर। रमजान के महीने में मुसलमान पुरुष, औरत, आकिल बालिग पर रोजा रखना फर्ज है। इसी महीने में कुरान नाजिल हुआ। यह महीना इंसानों को तमाम तरह के गुनाहों से बचकर रहने का सबक देता है। शेर वाली मस्जिद के पेश इमाम मौलाना कारी जिया जौनपुरी का कहना है कि रोजा दीने इस्लाम का एक रुक्न है। लिहाजा एहतेराम के साथ सभी लोग रोजा रखें। रोजेदारों की इज्जत करें, नमाजे पंजगाना के साथ नमाज तरावीह भी पढ़ें। ज्यादा से ज्यादा वक्त अल्लाह की बंदगी में गुजारना चाहिए। अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी और बख्शीश की दुआ मांगें। अपने गरीब भाइयों की मदद खैरात, जकात में पैसों, सामग्रियों से करें। आपस में मेल मोहब्बत का बरताव करें। क्योंकि माहे रमजान अमन शांति, भाईचारा का सबको पैगाम देता है। हम इंसान हैं इंसानियत के रास्ते पर चलें। अल्लाह के परस्तार और नबी के वफादार बनकर अपने मुल्कों मिल्लत दीनों ईमान की इज्जत व शान बढ़ाते रहें। वह कहते हैं कि जिंदगी बड़ी अनमोल चीज है। इसे बेकार गुनाहों में न डालें। जितना हो सके नेक अमाल अच्छे काम कर के जिंदगी अपनी कामयाब बनाएं। अपने पैदा करने वाले मालिक अल्लाह और उसके पैगंबर की खुशी हासिल करें। यही माहे रमजान का मकसद है।
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