सीताकुंड अयोध्या से पधारे स्वामी प्रेमदास रामायणी महराज ने कहा कि कलियुग में श्रीमद्भागवत कथा सुनने से मनुष्य के सभी पाप स्वत: समाप्त हो जाते है। गुरुवार को क्षेत्र के चवरी गांव मे चल रही सात दिवसीय कथा के पहले दिन भक्तों के बीच प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि जब-जब धरती पर धर्म की हानि होती है, अभिमानी असुर अनीति पर चलकर लोगों को सताते है तो धर्म की रक्षा एवं असुरों के उद्धार के लिए प्रभु अवतार लेते है। जहां कंस के लिए भगवान कृष्ण तो रावण के लिए प्रभु राम ने अवतार लिया था। परमात्मा की शरण में रहोगे तो संसार सागर से पार हो जाओंगे और माया के चक्कर में रहे तो भव बंधन में फसे रहोगे। भक्ति पथ पर चलने के लिए ज्ञानी होना जरुरी नहीं है। अगर जरुरी है तो प्रभु के चरणों में अनुराग। क्योकि प्रभु सर्वत्र विराजमान है। उन्हें केवल प्रेम से खोजने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि जिस पर प्रभु की अति कृपा होती है। वही सत्संग की राह पर चलता है। कथा में दिलीप गुप्त, अरविंद, शैलेन्द्र तिवारी, भैयालाल तिवारी, अम्बरीष गुप्त, सुरेश कुमार आदि उपस्थित रहे। आयोजक जवाहरलाल गुप्त ने आगंतुकों के प्रति आभार ज्ञापित किया।