जौनपुर। 23 वर्ष पूर्व जीआरपी चौकी शाहगंज में हुए सिपाही हत्याकांड में हाईकोर्ट के त्वरित निस्तारण के निर्देश एवं सीबीसीआईडी की मॉनिटरिंग के बावजूद अब तक मुकदमे का निस्तारण न होने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हत्याकांड में संबंधित कारतूस सदर मालखाने से कोर्ट में पेश न होने के कारण विवेचक की गवाही नहीं हो पा रही है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी प्रथम मो. नेयाज अहमद अंसारी ने जिलाधिकारी को मुकदमे से संबंधी कारतूस कोर्ट में में पेश करने का अल्टीमेटम दिया है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा नहीं करने पर अभियोजन की कार्यवाही समाप्त कर दी जाएगी। पूर्व में नोटिस के बाद सीओ नृपेंद्र कुमार के स्पष्टीकरण पर कोर्ट ने पाया कि छह वर्षों में मालखाने में स्थित सामानों की न तो लिस्ट बनाई जा सकी और न ही उसका कार्यभार किसी द्वारा ग्रहण किया गया। 4 फरवरी 1995 को जीआरपी के प्लेटफार्म नंबर चार पर पुलिसकर्मियों ने आरोपी राजकुमार को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उसी समय तत्कालीन विधायक उमाकांत यादव अन्य आरोपियों के साथ वहां पहुंचे। राइफल, पिस्टल व अन्य शस्त्रों से ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए राजकुमार को पुलिस हिरासत से छुड़ा ले गए। फायरिंग में जीआरपी सिपाही अजय सिंह की मौत हो गई व अन्य पुलिसकर्मी घायल हो गए। मामले के शीघ्र निस्तारण का हाईकोर्ट का आदेश है। कार्यवाही की रिपोर्ट वहां भेजी जाती है।