जौनपुर। खरपतवार, कीटों और चूहों से फसलों को बर्बाद होने से बचाने के लिए किसानों को बीज व भूमि का शोधन करना आवश्यक है। बीज व भूमि का शोधन किए बिना फसल की बुआई करने के बाद रोगों का प्रभाव उस पर पड़ने लगता है। जिससे फसले बर्बाद हो जाती हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी राजेश कुमार राय ने कहा कि हर साल खरपतवार, कीटों और चूहों से 15 से 20 फीसदी फसल बर्बाद हो जाती है। इससे किसानों को काफी नुकसान होता है। बीज जनित व भूमि जनित रोगों से फसलों को बचाने के लिए बीज व भूमि शोधन बहुत आवश्यक है। बीज व भूमि शोधन द्वारा फसल की रोगों से सुरक्षा करके अधिक पैदावार लिया सकती है। उन्होंने बताया कि धान नर्सरी डालने से पहले किसानों को बीज का शोधन और मक्का, ज्वार, बाजरा को झुलसा व कंडुआ रोग से बचाने के लिए कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी का प्रयोग 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करना चाहिए। जबकि थीरम 75 प्रतिशत डब्ल्यूएस का प्रयोग 2.50 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से करना चाहिए। मूंगफली में क्राउनराट व टिक्का रोग के रोकथाम के लिए थीरम 75 प्रतिशत डब्ल्यूएस का प्रयोग 2.50 ग्राम प्रति किग्रा की दर से और टेबूकोनाजोल दो प्रतिशत डीएस प्रयोग करना चाहिए। फसल बोने से पहले किसानों को भूमि शोधन कर लेना चाहिए। इसके लिए 2.5 किग्रा ट्राइकोडरमा व ब्यूवेरिया बेसियाना का प्रयोग प्रति हेक्टेयर की दर से 65 से 70 किग्रा गोबर की खाद में मिला कर करना चाहिए। लेकिन पहले उसे एक सप्ताह तक छायादार स्थान पर रख देना चाहिए। उस पर पानी का हल्का छिड़काव करते रहना चाहिए। इसके बाद गोबर की खाद को खेत में मिला दें।