जौनपुर। मगफ़िरत और इबादत की रात शब-ए-बरात में लोगों ने अपने गुनाहों की माफी मांगने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इबादत का जो सिलसिला मगरिब की नमाज के बाद के शुरू हुआ वह दूसरे दिन सुबह पांच बजे तक चलता रहा।
सदर इमाम बाड़ा, कल्लू इमाम बाड़ा, बड़ी मस्जिद, शिया जामा मस्जिद, अर्टामस्जिद, अली घाट, सिपाह, मखदूम शाहअढ़हन, चाहारसू, बलुआघाट, मुल्ला टोला, इस्लाम का चौक, भंडारी, सिटी स्टेशन, नईगंज, ख्वाजादोस्त, शाही पुल, फुलपुर, सैदनपुर, कजगांव, ताड़तला, जौनपुर आजा़दारी काउंसिल कार्यालय नकी फाटक, रसूलाबाद, शाह का पंजा, कदम रसूल, मुफ्ती मोहल्ला आदि स्थानों पर रात भर चहल-पहल रही। लोग कब्रिस्तानों और दरगाहों पर पुरखों की कब्रो पर पहुंचकर सूरे फ़ातेहा पढ़ा। इमाम-ए-जुमा जौनपुर मौलाना महफुजुल हसन खां एवं मौलाना मुस्तफा खां इस्लामी व शिया जामा मस्जिद के मुतावल्ली प्रबंघक शेख अली मंजर डेजी ने इमाम-ए-जमा़ना की वेलादत पर सभी को मुबारक बाद पेश की। इसी क्रम में शिया जामा मस्जिद नवाब बाग कसेरी बाजार में मौलाना मुस्तफा खां इस्लामी के नेतृत्व में रात भर अल्लाह की इबादत की गई। भोर में इमाम-ए-जमाना, इमाम मेहंदी (अ.स) के वेलादत के अवसर पर महफिल का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने अपने बेहतरिन कलाम पेश किया। फजिर की नामाज जमात से मौलाना ने पढ़ाई। जुलुस की शक्ल में शिया जामा मस्जिद से सैकडों की संख्या में स्त्री एवं पुरुष व बच्चे तकबीर, अल्लाह होअकबर, नारे रिसालत, या रसूल अल्लाह, नारे हैदरी, या अली, नारे सलवात के साथ शाही पुल पर पहुॅच कर नजर में शामिल हुए। हाजतो को लिख कर एवं दुआ पढ़ कर अरीजे को गोमती नदी के हवाले किया।