नगर के हिंदी भवन में गुरुवार को लोकतंत्र और संविधान पर मंडराते खतरे विषयक एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। संविधान बचाओ लोकतंत्र बचाओ अभियान नई दिल्ली की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में सामाजिक , राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता, साहित्यकारों ने हिस्सा लिया। नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हो रहे हमलों, न्याय पालिका की स्वायत्तता पर बढ़ते खतरे को बताते हुए लोगों ने चिंता जताई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए अभियान के गुजरात के कन्वीनर देव देसाई ने कहा कि लंबे संघर्ष और लाखों लोगों की कुर्बानी के बाद हमे जो आजादी मिली और लोकतंत्र का रास्ता चुना। बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की अगुवाई में जो संविधान बना आज वह खतरे में है। देश की जनता को संविधान और लोकतंत्र को बचाने को आगे आना होगा। कामरेड जय प्रकाश सिंह ने कहा कि आज देश अघोषित आपातकाल के दौर से गुजर रहा है। भुखमरी, गरीबी, उत्पीडन, हत्या, लूट डकैती आम बात हो गई है। जो लोकतंत्र को कलंकित कर रही है। पूर्व विधायक हाजी अफजाल अहमद ने कहा कि यदि देश की धर्म निरपेक्षता को बचाने के लिए लोग आगे नहीं आए तो देश की गरिमा खतरे में पड़ जाएगी। संविधान को बचा पाना मुश्किल होगा। इस मौके पर लाल प्रकाश राही, फैसल तबरेज, किरन शंकर रघुवंशी, अनुराग मिश्र, मंजू शास्त्री, लालबहादुर सिद्धार्थ, रेनू सिंह, माया टंडन, संजय श्रीवास्तव, कल्पनाथ गुप्त ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता डा. महेंद्र प्रताप सिंह व संचालन जुलेखा जबीन ने किया।