वाराणसी-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन बनाने का काम जिले में कानूनी पेंच में फंस गया है। राजस्व विभाग की लापरवाही के चलते फोरलेन की राह में पड़ने वाले कई भूखंडों का नंबर गजट में शामिल नहीं हो सका है। जिससे संबंधित भूखंडों का अधिग्रहण नहीं हो पाया है। इस कारण कई स्थानों पर फोरलेन निर्माण का काम ठप है। अब गजट से छूटे हुए भूखंडों की रजिस्ट्री कराने के बाद ही काम शुरू हो सकता है। जिले में यह मार्ग करीब 65 किमी तक है।
राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण की प्रक्रिया वर्ष 2011 से शुरू है। 25 दिसंबर 2012 को जमीन अधिग्रहण के लिए गजट हुआ था। जिन स्थानों पर जमीन का कोई विवाद नहीं है, वहां निर्माण चल रहा है। लेकिन कई स्थानों पर फोरलेन का निर्माण इसलिए शुरू नहीं हो पा रहा है कि वहां की जमीन का अधिग्रहण कानूनी पेंच में फंसा है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों की चूक से कई किसानों की जमीन गजट से छूट गई थी। जौनपुर की सीमा में सिंगरामऊ के हरिहरपुर के पास से वाराणसी की सीमा पर स्थित त्रिलोचन तक 50 से अधिक काश्तकारों की जमीन का नंबर गजट में शामिल नहीं हो सका था। जिससे संबंधित स्थानों पर निर्माण का काम नहीं हो पा रहा है। गजट से छूटे हुए भूखंडों का दोबारा गजट भी नहीं हो सकता। अब संबंधित किसानों से उनकी अराजी को एनएचआई को रजिस्ट्री कराना होगा। जैसे बक्शा के दूबेचक निवासी हरिलाल प्रजापति की अराजी गजट में आने से छूट गई थी। इसी तरह उमरपुर निवासी शेषनाथ की एक डिस्मिल जमीन का गजट नहीं हो सका। अब यहां फोरलेन का निर्माण रुका हुआ है।
कोट:
राजस्व विभाग की चूक की वजह से जौनपुर की सीमा में आने वाले करीब 50 से अधिक किसानों की अराजी गजट में छूट गई थी। अब एनएचआई उनकी अराजी का रजिस्ट्री कराएगा। पिछले एक महीने में दस किसानों से उनकी जमीन की रजिस्ट्री कराई जा चुकी है। दरअसल जो जमीन गजट में आने से रह जाती है, उसे सीधे किसान से ले लिया जाता है।
रामआसरे सिंह
मुख्य राजस्व अधिकारी जौनपुर