वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ाई बरती तो परीक्षकों की संख्या बढ़ गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस जारी कर कहा था कि जो शिक्षक प्रायोगिक परीक्षा में परीक्षक बनना चाहते हैं उन्हें कॉपियों का मूल्यांकन करना होगा। मौजूदा समय में विश्वविद्यालय में पांच सौ से अधिक शिक्षक कापियों का मूल्यांकन कर रहे हैं जबकि पिछले साल यह संख्या पांच सौ से कम थी।
विश्वविद्यालय से संबद्ध पांच जिलों के 805 कालेजों में शिक्षकों की लंबी फौज है। लेकिन इसमें से अधिकांश शिक्षक मूल्यांकन करने से कतराते हैं। लेकिन जब प्रैक्टिकल परीक्षा का समय आता है तो परीक्षक बनने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं। उनकी कोशिश होती है कि अधिक से अधिक कालेजों में प्रैक्टिकल के लिए उन्हें कालेज का एलाटमेंट कर दिया जाए। मूल्यांकन में परीक्षक नहीं आने के कारण मूल्यांकन का काम प्रभावित होता है। परीक्षा शुरू होने से पहले ही विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ कर दिया था कि जो शिक्षक मूल्यांकन नहीं करेंगे उन्हें प्रायोगिक परीक्षा में परीक्षक नहीं बनाया जाएगा। विश्वविद्यालय से फरमान जारी होने के बाद मूल्यांकन में परीक्षकों की संख्या बढ़ गई। विश्वविद्यालय में पांच केंद्रों पर मूल्यांकन तेज गति से चल रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन को 31 मई के पहले हर हाल में रिजल्ट घोषित कर देना है। रिजल्ट समय से घोषित करने को लेकर विवि प्रशासन पूरी तरह से सक्रिय है।