जौनपुर। जिले से गुजरने वाले चार हाईवे के चौड़ीकरण और अन्य विकास कार्यों के चलते पांच साल में तीन लाख से अधिक पेड़ काटे गए हैं। इसके बावजूद जिले में हरियाली का दायरा बढ़ा है। सेटेलाइट सर्वे से पता चला है कि जिले में वन आच्छादन में पांच सालों में 16 फीसदी का इजाफा हुआ है। पांच साल में विभाग ने 15 लाख पौधे लगाए हैं। दावा है कि इसमें 13 लाख पौधे सुरक्षित हैं, जो एक दशक बाद ही वन क्षेत्र का हिस्सा बनेंगे।
जिले का क्षेत्रफल तीन लाख 99 हजार 713 हेक्टेयर है। वर्ष 2011-12 में जिले में 63 हेक्टेयर में वन क्षेत्र था। इसके अलावा उद्यान, झाड़ी और छिटपुट पेड़ 4649 हेक्टेयर क्षेत्रफल में हैं। वर्ष 2015-16 में बढ़कर उद्यान, वृक्ष, झाड़ी का क्षेत्रफल 4676 हेक्टेयर और नव क्षेत्र का दायरा बढ़कर 259 हेक्टेयर हो गया। वाराणसी-लखनऊ राजमार्ग पर त्रिलोचन महादेव से हरपालगंज, इलाहाबाद-जौनपुर मार्ग पर मुगराबादशाहपुर से जौनपुर, आजमगढ़ मार्ग पर चंदवक से गौराबादशाहपुर और लुंबिनी दुद्धी मार्ग पर सिधवन से शाहगंज से बीच सड़क चौड़ी करने के लिए लाखों पौधों की कटान हुई है। अनुमान है कि राजमार्गों के चौड़ीकरण और अन्य कारणों से जिले में तकरीबन तीन लाख तैयार पेड़ काटे गए हैं। जो पौधे लगाए गए हैं, वे काटे गए दरख्तों की तुलना में बहुत छोटे हैं। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पांच साल में 15 लाख पौधे लगाए गए हैं, जिसने 13 लाख पौधे सलामत हैं। मगर ये पौधे वन क्षेत्र का हिस्सा तभी हैं जब इनकी उम्र 15 साल की हो जाएगी। वन विभाग का दावा है कि वह अब हर साल 300 हेक्टेयर भूमि पर पौधरोपण कर रहा है। इस साल 400 हेक्टेयर भूमि पर पांच लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है। एक हजार पौधों का रोपण करने में 25 हजार रुपये वन विभाग खर्च करता है। इस साल पौधरोपण पर सवा करोड़ रुपये खर्च करने की तैयारी है।
जिले में 16 प्रतिशत वृक्ष आच्छादन बढ़ा है। इस साल 400 हेक्टेयर भूमि पर पांच लाख पौध रोपण किया जाएगा। कई तरह की योजनाएं पौध रोपण को लेकर प्रदेश सरकार ने शुरू किया है। इसको लेकर बैठकें हुई हैं। शीघ्र ही इस पर अमल शुरू हो जाएगा। -एपी पाठक, डीएफओ।