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सड़क पर ही फेंक दिया जाता है मेडिकल बायो वेस्ट

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जौनपुर। सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट (जैव चिकित्सा कचरे) का निस्तारण ठीक से नहीं किया जा रहा है। लोगों की सेहत की निगहबानी करने वाले अस्पताल ही उसे कचरे के ढेर में असुरक्षित तरीके से फेंक रहे हैं। इससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। सबसे अधिक परेशानी तब होती है जब ऐसे कचरे में आग लगा दी जाती है।
शहर एवं ग्रामीण इलाकों में सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों से 250 अस्पतालों से प्रतिदिन तकरीबन 25 टन से अधिक कचरा निकलता है। इसमें काफी मात्रा में बायो मेडिकल वेस्ट होता है, जिसका उचित निस्तारण नहीं करना खतरनाक है। इस तथ्य की अनदेखी करते हुए उसे यूं ही फेंका जा रहा है। जिला महिला और पुरुष अस्पताल, सिविल अस्पताल शाहगंज के अलावा छह पीएचसी, 16 सीएचसी और 75 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य कैंद्र हैं लेकिन इन सरकारी अस्पतालों में भी बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण का इंतजाम नहीं है। इसके अलावा तकरीबन 200 नर्सिंग होम और अस्पताल हैं जहां बायो मेडिकल वेस्ट निकलता है। यह सारा कचरा इधर-उधर फेंक दिया जा रहा है। जिला अस्पताल ने बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के लिए हंडिया की एक कंपनी से करार किया है। तीन साल से प्राइवेट नर्सिंग होम का बायो वेस्ट इलाहाबाद की एक कंपनी के साथ समझौता है। कंपनी के द्वारा सभी नर्सिंग होमों को पॉलिथिन बैग दिया गया है। बावजूद इसके लोग इधर-उधर बायो मेडिकल वेस्ट फेंक रहे हैं। इस पर कोई रोक टोक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से किसी भी नर्सिंग होम मालिक को कोई नोटिस नहीं दी जाती।
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कोट--
सरकारी अस्पतालों से निकलने वाला मेडिकल बायो वेस्ट हर दूसरे दिन हंडिया की एक कंपनी की गाड़ी आकर ले जाती है। इसके एवज में उसे भुगतान किया जाता है। अगर कहीं कोई अस्पताल संचालक सड़क पर फेंक रहे हैं तो गलत है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। डा. आरके सिंह, डिप्टी सीएमओ
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कोट--
नर्सिंग होम संचालकों का तीन साल से इलाहाबाद की एक कंपनी के साथ समझौता है। उसके द्वारा पॉलिथिन बैग दिया गया है। उसमें बायो मेडिकल वेस्ट नर्सिंग होम संचालकों को रखना चाहिए। अगर कोई इधर-उधर फेंक रहा है तो आईएमए उसके खिलाफ कार्रवाई करने में पीछे नहीं हटेगा। आईएमए की सभी डाक्टरों से अपील है कि वे जैव चिकित्सा कचरे को इधर-उधर न फेंके और न ही जलाएं।-डा. एनके सिंह, आईएमए अध्यक्ष
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