बदलापुर/ घनश्यामपुर। मानस कोविद डा. मदनमोहन मिश्र ने कहा कि हम अपने बच्चों को कार नहीं बल्कि संस्कार जरूर दें। क्योंकि संस्कार से आदमी भला बनता है। भला व्यक्ति ही बड़ा होता है। वह क्षेत्र के बबुरा गांव में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन श्रोताओं को कथा का रसपान करा रहे थे। मानस कोविद ने राजा उत्तानपाद की दो रानियों सुरुचि एवं सुनीति में सुरुचि के पुत्र उत्तम तथा सुनीति के पुत्र ध्रुव का उदाहरण भी प्रस्तुत किया। कहा कि यदि जीव वेद- पुराणों, संत महात्माओं, एवं माता पिता की आज्ञा मान कर सुंदर नीति पर चलता है तो ध्रुव की तरह अक्षय स्थान को प्राप्त करता है। यदि मनमाना, स्वेच्छा चारिता तथा अपनी रुचि के अनुसार ही कार्य करेगा तो उत्तम की तरह उसका जीवन नष्ट हो जाएगा। अंतिम समय में व्यक्ति की जो मति होती है उसकी गति भी वैसी ही होती है। जैसे राजा भरत की मति मृग में चली गई। उन्हें मृग होना पड़ा। गाय, पृथ्वी, वेद, सती, प्रलोभन पर न झुकने वाले, सत्य बोलने वाले ही पृथ्वी पर संतुलन बनाए हुए हैं। कथा वाचक ने कहा कि जितने से अपना पेट भर जाए वही अपना धन है। इसके अलावा अर्जित धन को समाज, राष्ट्र एवं लोक कल्याण में लगाना चाहिए। कथा समापन पर डा. धर्मेन्द्र शुक्ल ने आभार तथा पूर्व प्रधानाचार्य गणेशदत्त शुक्ल ने प्रसाद वितरण किया। इस मौके पर अवनीश पांडेय, डा. विजय शंकर तिवारी, मनमोहन सिंह, रामसहाय पांडेय, राजेश दुबे आदि मौजूद थे।