जौनपुर। गर्मी शुरू होते ही पानी का धंधा चमक गया है। आरओ प्लांट के पानी के नाम पर ऐसे पानी की सप्लाई की जा रही जो लोगों की सेहत के लिए हानिकारक है। पानी का धंधा करने वाले लोग सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। शहर में करीब 50 प्लाटों से 20 हजार केन पानी की सप्लाई रोजाना की जाती है। आरओ के नाम पर अधिकांश सप्लायर लोगों को सामान्य पानी ठंडा करके पिला रहे हैं। कम गुणवत्ता के कारण जल जनित बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। लाइसेंस की बात करें तो विभाग के अधिकारी कहते हैं कि किसी भी आरओ प्लांट ने लाइसेंस नहीं लिया है। मनमानी तरीके से लोग धरती की कोख से पानी निकाल कर उससे मोटी कमाई कर रहे हैं।
पिछले वर्ष आरओ प्लांट के के पानी के 18 नमूने लिए गए थे जिसमें से जांच में 12 नमूने फेल हो गए थे। स्वास्थ्य विभाग की माने तो केन में सप्लाई होने वाला पानी पीने योग्य नहीं है। इनके पानी में जल जनित बीमारियां के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। इसमें पीलिया, हैजा, डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं। जिले में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक 200 से अधिक वाटर सप्लाई के प्लांट लगे हैं। इन प्लांटों से पानी लेकर कैंपर द्वारा शहर में वाटर सप्लाई का कार्य किया जाता है। पानी के केन दुकानदारों, व्यवसायिक संस्थानों के अलावा अब घरों में भी पहुंचने लगा है। सप्लायर सुबह केन मदें पानी भरकर लाते हैं। पानी भरा केन रख देते हैं और खाली केन लेकर चले जाते हैं। प्रत्येक केन बीस लीटर का होता है। एक केन की सप्लाई 25 से 30 रूपये में हो रही है। शहर समेत ग्रामीण इलाकों के 200 प्लांटों से प्रतिदिन करीब 40 हजार केन पानी की सप्लाई की जाती है। इस हिसाब से आरओ प्लांट के पानी का रोज 10 लाख से अधिक का कारोबार हो रहा है।
शासनादेश के मुताबिक खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग सिर्फ डिब्बा बंद और पैकिंग वाले उत्पाद तैयार करने वालों को लाइसेंस दे सकते हैं। आरओ प्लांट का पानी बेचने वाले खुला पानी बेचते हैं। कोई पैकिंग नहीं होती। इस नाते उन्हें लाइसेंस नहीं दिया जा सकता। शहर में पाउच में पानी भरकर बेचने वाले तीन लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं।
डॉ. वेदपति मिश्र अभिहित अधिकारी, खाद्य विभाग