ईंट उद्योग ने उपजाऊ भूमि के दायरे को समेट दिया है। सई नदी के किनारे बसे सुजानगंज, बरईपार से लेकर बरगुदर तक के इलाके में उपजाऊ भूमि की खुदाई कर ईंट तैयार की जा रही हैं। जिसके कारण उर्वर भूमि का दायरा सिमटता जा रहा है। इससे पैदावार प्रभावित हो रही है।
सई नदी के किनारे बसे गांवों में ईंट उद्योगों की भरमार है। ईट की पथाई में खेतों की मिट्टी का उपयोग किया जाता है। किसानों के खेतो को भट्ठा मालिक एक निश्चित रकम देकर लेते हैं और उसकी मिट्टी तयशुदा गहराई तक खोदकर ईंट बनाते हैं। इस प्रकार भूमि की ऊपरी सतह पर पाई जाने वाली उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है। ईंट भट्ठों की बहुलता के कारण ही उपजाऊ भूमि वाला यह क्षेत्र अब ऊबड़खाबड़ भूमि वाला इलाका बनकर रह गया है। धीरे-धीरे उपजाऊ भूमि का दायरा घटता जा रहा है। कृषि उपज भी घट रही है। फसल की पैदावार घटने से लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है।
बाजार की सड़कों पर अतिक्रमण से बढ़ी दुर्घटनाएं
मीरगंज। क्षेत्र की प्रमुख बाजारों में सड़क पर अतिक्रमण किए जाने से दुर्घटना का आशंका बढ़ गई है। शाम को ठेले खोमचे वालों की वजह से बीच सड़क पर भीड़ नजर आती है. जबकि कुछ बाजार प्रमुख मार्ग मछलीशहर, जंघई मार्ग पर है। इसके चलते वाहनों से दुर्घटनाएं आए दिन हो रही हैं। मछलीशहर-जंघई सड़क पर पड़ने वाली मोलनापुर, गोधना बाजार, अदारी, जगदीशपुर, बरावा, बंधवा बाजार, तिलौरा व जमुहर बाजार में सड़क काफी संकरी है। पहले से ही इस बाजार में जगह कम है। शाम होते ही ठेले खोमचे व जमीन पर सब्जी बेचने वाले व्यापारी सड़क की पटरियों पर अपनी दुकानें सजा देते हैं। इससे बाजार में भीड़ बढ़ जाती है। थानाध्यक्ष का कहना है की सड़कों से अतिक्रमण हटवाए जाएंगे। ठेले खोमचे वालों को सही जगह पर शिफ्ट किया जाएगा।