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पूविवि के अधूरे पड़े भवनों की चांज को समिति गठित

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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय परिसर में कई भवन वर्षों से बन रहे हैं। कुछ का काम रुक गया है। ऐसे अधूरे भवनों की जांच कराई जाएगी और कामकाज की दिक्कतों को दूर किया जाएगा। अधूरे भवनों की जांच के लिए समिति का गठन किया गया है। विश्वविद्यालय में पिछले दिनों एक सेमीनार में आए उप मुख्य मंत्री डा. दिनेश शर्मा अधूरे कार्यों का विवरण तलब किया था। जांच को उसी से जोड़ कर देखा जा रहा है।
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विश्वविद्यालय परिसर में इंडोर स्टेडियम, कैफी संचार भवन, लेक्चर थियेटर, अंतर्राष्ट्रीय गेस्ट हाउस, बायोटेक्नॉलाजी भवन, कर्मचारी आवास, चार हजार लोगों के बैठने की क्षमता वाले संगोष्ठी भवन आदि का निर्माण लगभग दस साल पहले शुरू किया गया था। कुछ भवनों की केवल नींव भरी गई है कुछ का पिलर तक काम हुआ है। कुछ भवनों का छत ढाली जा चुकी है। राजकीय निर्माण निगम, क्षेत्रीय प्रबंधन भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता मर्यादित आदि एजेंसियां काम कर रही हैं। काम की गति धीमी होने के कारण जो भी निर्माण हुआ है, वह नष्ट हो रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अधूरे पड़े भवनों के सत्यापन के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। डा. राजकुमार सोनी समिति के अध्यक्ष बनाए गए हैं। समिति इस बात की जांच करेगी कि भवन निर्माण की लागत कितनी थी, समय से एजेंसी को कितना भुगतान हुआ और उसमें कितना काम होना चाहिए था। कार्य के अधूरे रहने के कारण क्या हैं। उस रिपोर्ट के आधार पर ही काम होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन निर्माण एजेंसियों को भी पत्र जारी कर निर्माण का पूरा विवरण तलब किया है। वर्षों से अधूरे भवनों की लागत कई गुना बढ़ चुकी है, एजेंसियों के समय से काम नहीं करने कारण यह समस्या पैदा हुई है।
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