जौनपुर। करीब ढाई लाख की आबादी वाले इस शहर में प्रति दिन 90 टन से अधिक कचरा निकलता है। उसके निस्तारण का मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने के कारण नगर पालिका के कर्मचारी घनी आबादी वाले इलाकों में ही डंप कर रहे हैं। इससे आसपास रहने वाले दुर्गंध से परेशान हैं। हालात तब और मुश्किल हो जाते हैं जब इन कूड़ों के ढेर में आग लग जाती है। जहरीले धुएं से लोगों के घर भर जाते हैं।
नगर पालिका वाजिदपुर तिराहा से लेकर पचहटिया तक सड़क किनारे कूड़ा डंप कतर रही है। आसपास के लोगों की शिकायतों और विरोध के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। शहर में प्रतिदिन 90 टन कचरा निकलता है लेकिन उसके निस्तारण का कोई ठोस बंदोबस्त नहीं है। कूड़ों के इसी ढेर में मेडिकल वेस्ट भी फेंक दिया जाता है। वाजिदपुर, जेसीज, सेंट पैट्रिक स्कूल के सामने, पंचहटियां, सिपाह रेलवे क्रासिंग, लालजी टाकिज के पीछे, जोगियापुर आदि स्थानों पर कूड़ा डंप किया जा रहा है। शाम ढलते ही कचरों के ढेर में आग लगा दी जाती है। आसपास का क्षेत्र धुएं से भर जाता है। लोगों का दम घुटने लगता है। चिकित्सक डा. वीएस उपाध्याय कहते हैं कि कूड़े से निकलने वाले जहरीले धुएं से लोग दमा और हृदय रोग से पीड़ित हो सकते हैं।
रोक के बावजूद जला रहे कूड़ा
जौनपुर। जिले में कूड़ा जलाने पर रोक है। नगर पालिका ने वाजिदपुर में इस आशय का बोर्ड लगवाया था कि कूड़ा जलाने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी। रोजाना कहीं न कहीं कूड़ा जलाया जा रहा है। इसके बावजूद पालिका प्रशासन ने छह माह में एक भी कार्रवाई नहीं की। अलबत्ता वह बोर्ड गायब जरूर हो गया। कचरे के निस्तारण केे लिए जिला मुख्यालय से छह किमी दूर कुल्हनामऊ में सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण कराया जा रहा है लेकिन कार्यदायी एजेंसी की सुस्ती के चलते अभी काम पूरा नहीं हुआ।
सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। इसका निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ही कूड़ा निस्तारण का उचित प्रबंध हो सकेगा। वैसे खाली स्थानों पर ही कूड़े का निस्तारण किया जा रहा है। कचरा जलाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। अगर ऐसा हो रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।-कृष्णचंद्र, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका
बायोमेडिकल वेस्ट घातक
जौनपुर। जैव चिकित्सकीय कचरे के निस्तारण का कोई बंदोबस्त नहीं है। अस्पतालों से निकलने वाला कचरा भी सामान्य कचरे में ही फेंका जा रहा है। चिकित्सकों के मुताबिक बायोमेडिकल वेस्ट से बीमारियां फैलती हैं और उनका निस्तारण अलग से होना चाहिए। इसके बावजूद नगर पालिका ने अस्पतालों के कचरे के निस्तारण की कोई ठोस योजना नहीं बनाई है।