फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डोभी के किसानों को डीएम ने आर्विटेशन में बनाया पक्षकार

विज्ञापन
विज्ञापन
जौनपुर। वाराणसी से नेपाल की सीमा तक बनने वाले हाईवे के मामले में मंगलवार को डीएम ने किसानों की बात सुनने के बाद उन्हें पक्षकार बनाया है। डीएम कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया के परियोजना निदेशक एसबी सिंह एवं उनके अधिवक्ता आए थे। उसी दौरान डोभी के किसान भी पहुंच गए और अपना पक्ष सुनने की मांग करने लगे। वाराणसी से आए अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने किसानों का पक्ष रखा तो डीएम ने उन्हें भी पक्षकार बना लिया।
विज्ञापन

वाराणसी - इंडो नेपाल बार्डर हाइवे निर्माण की अभिसूचना वर्ष 2012 में जारी हुई थी। इसमें जौनपुर के डोभी क्षेत्र के बीस गांवों के 3497 किसानों को भूमि अधिग्रहण का नोटिस दिया गया। इसमें 16 किलोमीटर में तकरीबन 184 एकड़ भूमि ली जानी है। वर्ष 2015 की दर से मुआवजा किसानों को दिया जाने लगा तो उन्होंने उसे लेने से मना कर दिया। किसानों की कई बार पंचायत हुई। विधानसभा चुनाव के दौरान किसानों ने चुनाव आयोग तक प्रशासन की शिकायत की। 26 अगस्त 17 को चंदवक विकास खंड में किसानों की पंचायत अधिकारियों के साथ हुई, जिसमें सड़क के किनारे की जमीन पर 17 लाख रुपये बिस्वा एवं दूर के खेतों का आठ से 12 लाख रुपये बिस्वा की दर से मुआवजा देने पर सहमति बनी। डीएम के यहां एनएचएआई ने मामला आर्विटेशन का दायर कर दिया। इस मामले की सुनवाई कर दर तय करने का डीएम को अधिकार है। इसी मामले में डीएम ने एनएचआई को सुनवाई के लिए बुलाया था। इसकी जानकारी होने पर किसान अपने अधिवक्ता के साथ कलेक्ट्रेट पहुंच गए। अधिवक्ता ने काउंटर लगाया और डीएम को किसानों का पक्ष भी सुनने का आग्रह किया। डीएम ने किसानों का पक्ष सुनने के बाद प्रतिकर निर्धारण में विसंगति समाप्त करने का भरोसा दिया।

बोले किसान, मिले उचित मुआवजा
जौनपुर। उचित मुआवजे के लिए किसान दो साल से संघर्ष कर रहे है। विधायक दिनेश चौधरी ने पिछले दिनों किसानों की मुलाकात मुख्यमंत्री से कराई थी। खुज्झी गांव के किसानों के नेता राजेंद्र सिंह का कहना है कि दो सालों से मुआवजे की मांग की गई है। हरदासीपुर गांव के किसान रामेश्वर सिंह का कहना है कि प्रशासन भूमि का उचित मुआवजा नहीं दे रहा है। जो मुआवजा दिया जा रहा है वह आजमगढ़ के किसानों से कम है। बलुआ घाट की किसान चंद्रमा देवी ने कहा कि संपूर्ण भूमि हाइवे सड़क निर्माण में चली गई है। उचित मुआवजा नहीं मिला तो परिवार कैसे चलाएंगे। इसी गांव की मधुबाला ने कहा कि हाइवे पर दुकान उनकी चली गई है। ऐसे में आजीविका का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि 3500 किसानों में किसी ने नोटिस प्रशासन की नहीं लिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें