नेवढ़ियां गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में प्रयाग के संत भोलेनाथ ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का बड़े ही मार्मिक तरीके से वर्णन किया। सुदामा जब पूछते-पूछते कृष्ण के महल तक पहुंचे, तो दरबारी ने साधु जैसे लगने वाले सुदामा से पूछा, यहां क्या काम है। सुदामा ने जवाब दिया मुझको कृष्ण से मिलना है। वह मेरा मित्र है। उन्होंने कहा कि कृष्ण और सुदामा का प्रेम सच्चा मित्र प्रेम था। मित्रता में ऊंच नीच शब्द नहीं होता और ना ही अमीरी और गरीबी की खाई होती है। इसीलिए युगों बाद भी भगवान कृष्ण और सुदामा की दोस्ती प्रेम के प्रतीक के रूप में याद की जाती है। जहां एक और तीनों लोगों के मालिक और दूसरी तरफ भरता गंभीरता सहनशीलता गरीबी का प्रतीक सुदामा। लेकिन भगवान कृष्ण ने उन्हें मित्रता में राजा बना दिया ।