जौनपुर। जिले के 21 विकासखंडों और 27 थानों के 2950 स्थानों पर होलिका जलाई जाएगी। इसमें 69 स्थानों को संवेदनशील में चिंहित किया गया है। इसके लिए 5 हजार लोगों को शांतिभंग में पाबंद किया गया है। सभी होलिका स्थानों पर पुलिस का पहरा रहेगा। एसओ और सीओ अपने-अपने क्षेत्र में भ्रमण पर रहेंगे। उधर विद्वानों के मुताबिक दिन और भद्रा काल में होलिका जलाना अच्छा नहीं है। ऐसे में शाम 6-58 के बाद होलिका का दहन किया जाएगा।
सिंगरामऊ थाना क्षेत्र के केवटली कला गांव के प्रधान अशोक कुमार मिश्र की अध्यक्षता मे बुधवार को बैठक कर गांववासी होली नहीं मनाने का निर्णय लिए। बैठक में तय किया कि होलिका दहन की जमीन विवादित होने के कारण होलिका दहन नहीं करेंगे। इसी तरह कई अन्य स्थानों पर भी विवाद का मामला सामने आया है। उधर ज्योतिषविद और रत्न विशेषज्ञ संदीप पांडेय का कहना है कि 1 मार्च फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को होलिका दहन होना चाहिए। परंतु दिन में भद्राकाल होने के नाते इसकी समाप्ति के बाद ही होलिका दहन का मुर्हूत बनेगा। कर्मकांड के पंडित मुरारी श्याम पांडेय का कहना है कि होलिकादहन के विषय में कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओं का पालन अनिवार्य है जैसे फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा हो, रात्रि में होलिकादहन हो तथा भद्रा बीत चुकी हो। 1 मार्च गुरूवार को भद्रा (प्रदोषकाल) सायं 6-58 बजे समाप्त हो जाएगी। अत: 1 मार्च गुरूवार को क्षयवती पूर्णिमा में भद्रा सायं 6-58 बजे के बाद होलिका दहन का मूहूर्त प्रारंभ हो जाएगा। होलिका दहन के लिए प्रदोषकाल सर्वोत्तम माना जाता है। इसको ध्यान में रखते हुए मूहूर्त के अनुसार होलिका दहन करना चाहिए।