जौनपुर। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पर्यावरण एवं धारणीय विकास संस्थान की ओर से आयोजित संगोष्ठी में किसानों को जैव उर्वरकों के इस्तेमाल के लाभ बताए गए। सोंधी विकासखंड के जमुहाई में आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने समय-समय पर मिट्टी की जांच कराए जाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि जैविक उर्वरक का प्रयोग गेहूं के अलावा धान, चना, मटर, अरहर, मक्का, सरसों और सब्जियों के फसल में किया जा रहा है। इसमें बीच का उपचार करते हैं। वही पौधों की जड़ों, कंद और मिट्टी का भी उपचार करते हैं। यह सब उत्पादन में वृद्घि के साथ-साथ अनाज के दाने सुडौल स्वरूप खनिज तत्व अधिक और खाने के स्वाद में वृद्घि होती है। इन सबका प्रयोग करने से किसान का परिवार भी स्वस्थ रहता है। परियोजनाओं के सह संचालन डा. पीसी अभिलाष, शोध छात्र दुर्गेश जायसवाल ने किसानों को जैविक खाद के उपयोग से होने वाले लाभ के बारे में जानकारी दी। डा. जेपी वर्मा, गोवर्धन कुमार चौहान, आनंद कुमार, गौरव, रितेश कुमार ने जैव उर्वरक को घर पर बनाने की ट्रेनिंग दिया। इस मौके पर ग्राम प्रधान रामसेवक, कुतुबद्दीन, राजकुमार, चंद्रेज, रामदुलार, श्यामबली, आदिल कुमार, अनिल कुमार, संतोष कुमार, चंदेलाल यादव, हाजिम शेख, अमित आदि किसान मौजूद रहे।