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गोमती नदी में प्रतिदिन घुलता है 50 एमएलडी कचरा

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गोमती नदी का पानी हाथ धोने लायक भी नहीं रह गया है। शहर का सारा सीवेज सीधे गोमती में ही गिरता है। करीब 50 एमएलडी(मिलियन लीटर प्रतिदिन) से अधिक कचरा रोज नदी में घुल जा रहा है।
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शहर में कलीचाबाद से लेकर रामघाट तक 21 नाले हैं। जिनके माध्यम से शहर की गंदगी सीधे गोमती नदी में गिरती है। इसमें छह बड़े नाले हैं । अकेले इन छह बड़े नालों से होकर 50 एमएलडी कचरा रोज नदी में गिरता है। जिससे गोमती नदी में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। नदी में शाही पुल से लेकर रामघाट तक प्रदूषण का स्तर अधिक है। नदी के घाटों पर भी कचरा जमा है। शाही पुल से लेकर सद्भावना पुल और शास्त्री पुल के बीच नदी के दोनों छोर पर शैवाल जमा है। पानी का बहाव भी कम होता जा रहा है, जिससे पानी काला पड़ गया है। गोमती नदी में गिरने वाले शहर के प्रमुख नालों में कसिया नाला, पठान टोलिया नाला, दुमुहिया नाला, बलुआघाट नाला, मियांपुर नाला, जेल नाला आदि शामिल हैं। दुमुहिया नाला शहर में सबसे गंदे नालों में शुमार है। दुमुहिया नाला के आस पास गोमती नदी का टीडीएस 2340 है। जबकि मियांपुर नाला गोमती नदी में जिस स्थान पर गिरता है, वहां के आसपास का टीडीएस 1780 है। इसी प्रकार कसिया नाले के आस पास 2100, पठान टोलिया नाले के इर्द गिर्द 1920, बलुआ घाट नाले के पास 2300 और जेल नाला जहां गोमती में मिलता है, वहां के आसपास गोमती नदी का टीडीएस 2180 है।
इनसेट
स्वच्छ गोमती अभियान ने तैयार किया है प्रोजेक्ट
जौनपुर। गोमती को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए संघर्ष कर रही संस्था स्वच्छ गोमती अभियान की ओर से प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार को सौंपा गया है। आईआईटी रुड़की के पूर्व निदेशक प्रो. इंद्रमणि मिश्र व प्रो. वीएन मिश्र की देखरेख में तैयार किए गए प्रोजेक्ट में सभी नालों पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का सुझाव दिया गया है। इससे गंदे नालों का पानी ट्रीटमेंट के बाद नदी में छोड़ा जाएगा। सरकार ने अगर इस प्रोजेक्ट पर अमल किया, तो नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए शुरू किया गया अभियान काफी हद तक सफल हो सकता है।
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इनसेट
घाट समितियों को सौंपी गई है जिम्मेदारी
जौनपुर। गोमती को स्वच्छ बनाने के लिए संघर्ष कर रही संस्था स्वच्छ गोमती अभियान ने जौनपुर की सीमा में पड़ने वाले सभी घाटों पर घाट समितियां बनाई हैं। इन समितियों के माध्यम से समय समय पर घाटों पर नदी की सफाई की जाती है और नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाते हैं। इन समितियों के माध्यम से ही नदी के किनारे घाटों पर पौधरोपण भी हुए हैं।
कोट:
नालों को सीधे नदी में गिरने से रोकने के लिए जल निगम की ओर से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की कार्ययोजना बनाकर शासन को सौंपी गई है। बजट आने पर काम शुरू किया जाएगा।
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कृष्ण चंद्र
अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद जौनपुर
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