जौनपुर। जिले सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर ही नहीं हैं तो इलाज कौन करेगा। सीएचसी ,पीएचसी व एडिशनल पीएचसी में 268 चिकित्सकों की तैनाती होनी चाहिए। उनकी जगह महज 173 चिकित्सक ही तैनात हैं। इन डाक्टरों पर भी पोस्टमार्टम से लेकर पल्स पोलियो अभियान तक चलाने की जिम्मेदारी है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रोें पर रात में चिकित्सक रहते ही नहीं है। मजबूरन लोगों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है।
सरकार द्वारा लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भले ही नित नई कवायदें की जा रही हो लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण उनके सारे कवायद फेल साबित हो रहे हैं। वहीं लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। जिले में जिला पुरुष व महिला अस्पताल को छोड़ दिया जाए तो सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, एडीशनल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और राजकीय अस्पताल शाहगंज में चिकित्सकों की कमी है। जिले में 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और पांच प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सहित 73 एडीशनल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और राजकीय अस्पताल शाहगंज है। इन सभी अस्पतालों में 268 चिकित्सक तैनात करने के पद स्वीकृत हैं। लेकिन मात्र 173 चिकित्सक तैनात हैं। अभी भी 95 चिकित्सकों की कमी है। कई अस्पतालों पर चिकित्सक तैनात नहीं है और कुछ में एक ही डॉक्टर है, जिसके छुट्टी पर जाने पर अस्पताल बंद करने की नौबत पैदा हो जाती है। कुछ चिकित्सकों को एक साथ दो-दो स्थानों पर तैनात किया गया है, जो कहीं एक ही जगह जाते हैं।
अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए सभी एडीशनल पीएचसी पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती की जा रही है।-डा.ओपी सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी