अक्षर आरसी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक समिति की ओर से काव्य गोष्ठी का आयोजन पंडित मदन मोहन शुक्ला की अध्यक्षता में नरहन स्थित डा. बहादुर अली खान के आवास पर हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। साहब लाल ने सुनाया कि आजादी के दीवानों तुमको नमन हमारा, खून से सींचा है जिन्होंने ये गुलशन हमारा। डा. बहादुर अली ने पढ़ा कि आग लगने से महफूज वो घर किसके पास है, आप चैन से रात गुजारों ये खबर किसके पास है। नंदलाल समीर ने कहा कि, यदि मैं होता मंत्री का बाप, अजट बजट सब होता साफ, धोती पहनता ढील ढील, रसगु्ल्ला खाता छील छील, कटत चाय पकौड़ी आलू चाप ,यदि मैं होता मंत्री का बाप। शारदा प्रसाद ने कहा कि ये मेरे तजुर्बे से एक अच्छा परामर्श है , समझ समझ के न समझना एक आदर्श है। सूबेदार पांडेय ने कहा कि ना सिख होता है ना ईसाई होता है, ना हिंदू होता है ना मुसलमान होता है, सरहद पर मरने वाला हर वीर जवान होता है। दिनेश कुमार ने कहा कि हे पैसा तोहके आपन भगवान कहिला, हमरे पकिटवा से काहे अंतर ध्यान रहिला। इसके अलावा श्रीपति सिंह, पवन कुमार पांडेय, कृष्णा कुंदन, बृजेश लहरी आदि ने भी अपनी कविता व शायरी पेश किया। संचालन डा. बहादुर अली खान ने किया।