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दफ्तरों से लेकर चट्टी तक होती रही बजट की चर्चा

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लोकसभा में पेश हुए आम बजट को लेकर पूरे दिन लोग चर्चा में ही मशगूल रहे। शहर से लेकर गांव और दफ्तर से लेकर चट्टी चौराहों तक लोग इसी मसले पर चर्चा में व्यस्थ रहे। किसी ने कहा उम्मीदों के उलट रहा बजट तो किसी ने कहा इसके दूरगामी परिणाम अच्छे होंगे। बजट को अच्छा, खराब, संतोष जनक और निराशाजनक बताने वाले आपस में तर्क वितर्क करते रहे।
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विकास भवन की दूसरी मंजिल पर स्थित ग्राम्य विकास विभाग कार्यालय में दोपहर के वक्त कर्मचारी आपस में बजट को लेकर बहस में मशगूल रहे। सुजीत सिंह ने कहा कि कर्मचारियों को तो पूरी उम्मीद थी कि टैक्स में सरकार उन्हें राहत देगी लेकिन कुछ नहीं हुआ। यहीं पर मौजूद रौशन श्रीवास्तव ने कहा कि भाई क्या हुआ बजट में काम के आगे तो मै टीवी भी नहीं देख सका। तबतक दूसरे कर्मचारी ने मोबाइल पर बजट की मोटी मोटी बातों से कर्मचारियों को अवगत कराया। नखास स्थित विसर्जन घाट तिराहे के पास लगी बैठकी में भी लोग बजट पर चर्चा में मशगूल रहे। राजेश निषाद ने कहा कि मुझे तो बजट कुछ समझ में ही नहीं आया इतने में सत्येंद्र सिंह मुन्ना ने कहा कि इस बजट का दूरगामी परिणाम बेहतर होगा। देश की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। यहां मौजूद डा. कमलेश, अनिल शुक्ला, राजेश निषाद, धीरज सिंह ने भी इसी बात का समर्थन किया। नौपेड़वा बाजार में एक चाय की दूकान पर बजट पर चर्चा के दौरान प्रगतिशील किसान रामसमुझ यादव ने कहा सरकार ने तो कृषि उत्पादों का समर्थन मूल्य डेढग़ुना करने की बात तो कही है लेकिन खेती में लागत का अकलन सरकार ने नहीं बताया है। यहीं पर मौजूद सुरेश मौर्य और रामधीन चौहान ने रामसमुझ की बात में हां में हां मिलाते हुए कहा कि सब सरकार की जुमलेबाजी है। आखिर पहले किया गया वादा सरकार ने पूरा नहीं किया तो बजट भी तो एक वायदा ही है कैसे भरोसा किया जाए।
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