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तत्कालीन डीएम सर्वज्ञराम व पेशकार पर प्रकीर्ण वाद दर्ज

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जौनपुर। सरायख्वाजा में तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे के मामले में गलत नक्शा बनाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दायर वाद की सुनवाई नहीं करने के आरोप में पूर्व जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र ( वर्तमान डीएम मथुरा) व पेशकार अनवर के खिलाफ परिवाद दायर किया गया है। उन्हें तलब कर दंडित करने की मांग की गई है। सीजेएम अभिनय मिश्र ने प्रकीर्ण वाद दर्ज करते हुए सुनवाई के लिए 24 जनवरी की तिथि निर्धारित की है।
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सरायख्वाजा निवासी जियालाल ने गांव के तालाब की भूमि पर रामानंद द्वारा अतिक्रमण करने के खिलाफ तहसीलदार शाहगंज के कोर्ट में बेदखली का वाद दाखिल किया गया था। तहसीलदार रमाकांत ने आठ जनवरी 2016 को बेदखली का आदेश पारित किया। मगर तालाब का नक्शा ही बदल दिया गया। तालाब की जमीन को अतिक्रमण करने वालों की भूमि का हिस्सा दिखा दिया गया। बेदखली का मामला आया तो नक्शे में संशोधन करके भूमि का रकबा और बढ़ा दिया गया। अपर जिलाधिकारी राम सिंह ने तहसीलदार व नायब तहसीलदार द्वारा गढ़े गए कूटरचित प्रस्तावित मैप की जानकारी होते हुए उसे असली साक्ष्य के रुप में इस्तेमाल कर अविधिक आदेश 23 जनवरी 2016 को पारित कर दिया। इसके खिलाफ मुकदमा करने वाले ने निगरानी दाखिल तो तत्कालीन जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी ने बेदखली का आदेश मई माह में वापस ले लिया। उसके बाद जियालाल ने गलत नक्शा बनाने पर एजीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार आदि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए धारा 340 के तहत जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्र को आवेदन दिया। उनके पेशकार ने पत्रावली 16 जून 2017 तक दबाए रखी। अधिकारियों को दंड से बचाने के लिए वाद रजिस्टर नहीं किया और न जांच कराई। जब जियालाल ने विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ एवं राजस्व परिषद लखनऊ से शिकायत की तो पता चला कि उसके आवेदन पर सीआरओ न्यायालय में वाद प्रस्तुत करने का आदेश 16 जून 2017 को ही कर दिया गया था। इसके खिलाफ 14 अगस्त 2017 को अपील के लिए पेशकार को आवेदन पेशकार को दिया लेकिन उन्होंने लेने से इंकार कर दिया। जियालाल ने न्यायालय से कहा कि तत्कालीन जिलाधिकारी व पेशकार अनवर ने जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में जिलाधिकारी सर्वज्ञ राम और उनके पेशकार के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
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