जौनपुर। प्रदेश भर में स्वच्छता का सर्वे चल रहा है मगर सूबे के नगर विकास राज्यमंत्री गिरीशचंद्र यादव के अपने ही शहर की सफाई व्यवस्था चौपट है यह स्थिति तब है जबकि नगर पालिका इस मद में सालाना दो करोड़ रुपये खर्च करती है। नगर पालिका के अधिकारी बदहाली का सबसे बड़ा कारण ठेकेदारी प्रथा को मानते हैं जबकि पालिका ने खुद कूड़ा निस्तारण का उचित प्रबंध नहीं किया है।
नगर पालिका खुलेआम कचरा जला देती थी। इस पर उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को तलब किया था। तब हाईकोर्ट को अफसरों ने लिख कर दिया कि कचरा नहीं जलाया जा रहा है और उसका निस्तारण भी ठीक से हो रहा है। इसके बाद वाजिदपुर के पास बोर्ड लगाया कि यदि कोई कूड़ा जलाएगा और फेंकेेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसके बाद भी शहर में सफाई के हालत नहीं सुधरे। शहर की आबादी तीन लाख से अधिक है और रोजाना 90 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसे व्यवस्थित तरीके से रखने के लिए एक हजार कूड़ेदान की आवश्यकता है लेकिन नगरपालिका के पास महज 112 बड़े एवं 106 छोटे कूड़ेदान है। इसमें से अधिकतर गोमती नदी के किनारे मरम्मत के नाम पर डंप हैं। कुछ मोहल्लों एवं मुख्य चौराहों को छोड़कर ज्यादातर जगहों पर कूड़ा सड़कों पर भी फेंका जाता है। इसे दूसरे दिन दोपहर तक नगरपालिका के सफाई कर्मचारी उसे उठा ले जाते हैं।
शहर की सफाई के लिए 750 कर्मचारियों की जरूरत है। मगर ठेके पर 205 और संविदा पर 78 कर्मचारी तैनात हैं। ज्यादातर मुहल्लों की सफाई ठेकेदार के जिम्मे है और वहां मनमाने तरीके से सफाई कराई जाती है। इतने के बाद भी सफाई पर कोई जनप्रतिनिधि सवाल नहीं खड़ा करता है। राज कालोनी निवासी मून्नु यादव, यूपी सिंह कालोनी निवासी अरविंद सिंह, हुसैनाबाद निवासी प्रमोद का कहना है कि सफाई को लेकर जब शिकायत की जाती है तो नगर पालिका सफाई कर्मचारियों की कमी बताकर पल्ला झाड़ लेता है। नगर पालिका के अधिकारी भी ठेके कर्मचारियों की खामी बताकर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं जबकि सदर के विधायक गिरीश चंद्र यादव सूबे में नगर विकास राज्यमंत्री हैं।
चाहिए एक हजार कूड़ेदान
जौनपुर। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी कृष्णचंद्र शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था के लिए ठेका कर्मचारियों को जिम्मेदार ठहरा कर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर लेते हैं। उनका कहना है कि मानक के अनुसार सफाई कर्मी तैनात नहीं हैं। ठेके 205 ठेके के कर्मियों से सफाई कराई जा रही है लेकिन लेकिन वे काम ठीक से नहीं करते हैं। पर हकीकत कुछ और ही है शहर के 39 वार्डों में तकरीबन 1000 छोटे एवं बड़े कूड़ेदान चाहिए लेकिन नगरपालिका के पास बड़े 112 एवं छोटे और 106 बड़े कूड़ेदान हैं। इसमें अधिकांश जर्जर हो चुके हैं। अब जब कूड़ेदान ही नहीं है तो मजबूरी में लोग सड़कों पर कूड़ा फेंकते हैं और उनका उठान भी समय से नहीं होता है।