फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आठ वर्ष बाद भी मई घाट पर बन रहा पुल अधूरा

विज्ञापन
विज्ञापन
थानागद्दी। आठ साल में दो सरकारें चली गई किंतु गोमती नदी के मई घाट पर पुल का निर्माण पूरा नहीं हो सका। पुल निर्माण में विलंब से गुस्साए ग्रामीणों ने शनिवार को नदी की रेती पर प्रदर्शन किया और अगर पुल नहीं बनने पर मतदान के बहिष्कार का ऐलान किया।
विज्ञापन

मई घाट पर पुल नहीं बनने से क्षेत्र के कई गांवों के लोगों को तहसील मुख्यालय जाने के लिए 20 किमी की अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। सीधे जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। वर्ष 2004 में नाव डूबने से छह लोगों की मौत हो गई थी। तब से लोग नाव से जाने में डरते हैं। आ मई निवासी उदयभान सिंह पप्पू बताते है कि मायावती सरकार के मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी ने 15 सितंबर 2011 को इस पुल का शिलान्यास किया था। तब इसे 18 माह में बनाने का दावा किया गया था। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार आ गई। लोगों ने सांसद और विधायक से पुल का जल्द निर्माण कराने की गुहार लगाई। पर पुल नहीं बना और भाजपा की सरकार आ गई। मई निवासी कमलेश सिंह व रामआसरे विश्वकर्मा, पहाड़ीपट्टी के जितेंद्र सिंह,टुसौरी के विजय बहादुर सिंह तथा जितेंद्र सिंह ने कहा प्रत्येक वर्ष कोई न कोई नाव हादसा होता रहता है। मई -पसेवा घाट पर 4 करोड़ 22 लाख की लागत से18 माह में पुल बनना था लेकिन सरकारों ने इस पर ध्यान ही नहीं दिया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि भाजपा सरकार यदि इस पुल के निर्माण के लिए यथाशीघ्र कोई आश्वासन नहीं देती है तो हम लोग मतदान का बहिष्कार करेंगे। पुल निर्माण कार्य पूर्ण रूप से ठप्प होने से नाराज क्षेत्रवासी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर इस मुद्दे को गरमाने की कोशिश में जुट गए है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने नारा बुलंद किया कि पुल नहीं तो वोट नहीं। प्रदर्शनकारियों में सुंदरम सिंह, राहुल, सतीश, सौरभ, आशुतोष, राहुल, उज्ज्वल सिंह, बृजेश, चिन्टू, गोलू, अमित, अनूप, दिनेश, संजीव, दीपक, बजरंगी रिशु एवं गणेश शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें