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प्रभारी मंत्री को सौंपी झूठी रिपोर्ट

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जौनपुर। विकास विभाग के अफसर अपने आला अफसरों को ही नहीं बल्कि प्रभारी मंत्री और शासन को भी झूठी रिपोर्ट सौंपा रहे हैं। ऐसी ही घटना सोमवार को महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण एवं पर्यटन मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी की विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में सामने आया है। जहां डीपीआरओ ने उन्हें बता दिया कि जिले के सभी खराब इंडिया मार्का टू हैंडपंप की मरम्मत और रिबोर कर दिए गए हैं।
जिले के 21 ब्लाकों में 85135 इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगे हैं। जिसमें जलनिगम द्वारा नवम्बर माह में जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय को एक सूची भेजी गई थी जिसमें 5564 हैंडपंप के खराब और 1321 हैंडपंपों के रिबोर और 4243 हैंडपंपों में यांत्रिक गड़बड़ी की बात कही गई थी। हैंडपंपों की रिबोर और मरम्मत की धनराशि इस बार ग्राम पंचायतों के खाते में भेजी गई है। उन्हें ही इसे ठीक कराने की जिम्मेदारी दी गई है। ताकि लोगों को शुद्घ पेयजल समय से उपलब्ध हो सके। लेकिन सच्चाई यह है कि सभी गांवों में अधिकतर हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं। इसे ठीक नहीं कराया जा सका है। बावजूद महिला कल्याण, परिवार कल्याण, मातृ एवं शिशु कल्याण एवं पर्यटन मंत्री डा. रीता बहुगुणा जोशी की विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में जब हैंडपंपों के बारे में पूछा गया तो डीपीआरओ ने मंत्री को बता दिया कि सभी हैंडपंप रिबोर करा दिए गए हैं। बैठक में मौजूद भाजपा नेता शमशेर सिंह ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि अभी भी गांव में इंडिया मार्का टू हैंडपंप वैसे ही पड़े हैं। मंत्री को डीपीआरओ गुमराह कर रहे हैं। इसका समर्थन विधायकों ने भी किया और कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए कि रिबोर के नाम पर कितने लाख रूपए ग्राम पंचायतों ने निकाल लिए हैं और काम नहीं हुआ है। इस मांग के बाद विकास विभाग के अधिकारियों की परेशानी बढ़ गई है। जिला पंचायत राज अधिकारी सुधीर कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अभी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। वहीं सीडीओ आलोक कुमार का कहना है कि विकासखंडों से सूची मंगाई जाएगी। इसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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दूषित जल दे रहे हैं हैंडपंप
जौनपुर। गांवों में जो हैंडपंप लगे हैं। उनका पानी ठीक नहीं है। बावजूद इसके कोई विकल्प नहीं तलाशा जा रहा है। प्रधानों के जिम्मे सौंप तो दिया गया है लेकिन उनके पास टेक्निकल जानकारी नहीं है और न ही उन्हें तकनीक की जानकार ही मिल रहे हैं। ऐसे में वह न तो रिबोर करा पा रहे हैं और न ही ठीक करा पा रहे हैं। जांच हो तो ग्राम पंचायतों की कलई खुल सकती है। कारण उन्होंने इसके नाम पर पैसे निकालकर डकार लिया है।
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