जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय ने मानक की अनदेखी कर डीआरसी (डिपार्टमेंट रिसर्च कमेटी) के विशेषज्ञ की तैनाती की गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को नियमों के मुताबिक प्रोफेसर को ही विशेषज्ञ बनाया जाना चाहिए लेकिन इस नियम को धताबताते हुए डिग्री कालेज के एसोसिएट प्रोफेसर को यह जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
विश्वविद्यालय परिसर में संचालित मैनेजमेंट विषय की डीआरसी मंगलवार को बुलाई थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने डिग्री कालेज के शिक्षक को एक्सपर्ट बना दिया था। कालेजों में भी डीआरसी कराने की निर्देश दिया है, जिसमें बाह्य और एक्सपर्ट के अलावा एसओडी की मौजूदगी में डीआरसी कराई जा रही है। इससे पहले कालेजों में डीआरसी की कोई व्यवस्था नहीं थी। विश्वविद्यालय प्रशासन आरडीसी करा कर छात्रों को कालेज के संबंधित शिक्षक के पास भेज दिया जाता था। विवि की ओर से नियुक्त सुपरवाइजर के अधीन शोथार्धी पीएचडी वर्क पूरा करता था लेकिन अब व्यवस्था में फेरबदल कर विवि प्रशासन कालेज में डीआरसी कराने की व्यवस्था कर दी है।