जौनपुर। घने कोहरे के साथ गलन भरी ठंड के चलते मंगलवार को जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। जहां-तहां लोग ठिठुरे और दुकानों की भट्ठियों तथा अलाव के पास हाथ सेंकते नजर आए। घने कोहरे से दृश्यता काफी कम होने के कारण वाहनों की रफ्तार भी धीमी रही। असर यह रहा कि लोग अपने काम और कार्यालय में देर से पहुंचे। सोमवार को अधिकतम तापमान 23 और न्यूनतम 9 डिग्री सेल्सियस रहा लेकिन मंगलवार को न्यूनतम तापमान एक डिग्री सेल्सियस गिरकर आठ डिग्री पर पहुंच गया।
मौसम का मिजाज बदलने के बाद सोमवार की देर रात घना कोहरा छा गया जो सुबह 11 बजे तक कायम रहा। इस दौरान दृश्यता 25 फीट से भी कम रही। इसके चलते वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। चारपहिया और दोपहिया वाहन चालक दृश्यता कम होने के कारण धीमी रफ्तार से गाड़ी चला रहे थे। ट्रेनें और रोडवेज की बसें भी विलंबित रहीं। इसकी वजह से रेलवे स्टेशन और बस स्टेशनों पर यात्रियों को ठंड में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दोपहर 12 बजे हल्की धूप निकली तो लोगों को थोड़ी राहत मिली लेकिन ठंड में कमी नहीं आई। तीन बजे फिर बदली छा गई। घने कोहरे के बीच राहगीर जगह-चगह ठिठुरे नजर आए। वाहन और पैदल जा रहे लोगों ने जहां तहां चाय की दुकानों पर रुक कर चाय पी और भट्ठियों पर हाथ सेंकने के बाद आगे बढ़े। ठंड का असर अस्पताल में भी नजर आया। अन्य दिनों की अपेक्षा जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या अपेक्षाकृत कम नजर आई। जो मरीज आए वे खांसी, जुकाम से पीड़ित थे। सीएमएस डा. एसके पांडेय ने बताया कि मंगलवार को खासकर खासी, जुकाम से पीड़ित मरीज अधिक थे। उन्होंने लोगों को ठंड से बचने की सलाह दी है। उधर डा. बीना त्रिपाठी का कहना है कि ठंड की वजह से सर्दी और जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ी है। ऐसे मौसम में बुजुर्ग, बच्चों एवं महिलाओं को अपना खास खयाल रखना चाहिए।
कोहरे की वजह से सड़क दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। वाहनों की रफ्तार जहां धीमी हो गई है। वहीं हादसों की वजह से लोग कोहरे में यात्रा करने से परहेज करने लगे हैं। सोमवार की रात एवं मंगलवार की भोर में कई हादसे कोहरे की वजह से हुए। आंकड़ों पर गौर करें तो एक सप्ताह में पचास से अधिक लोग हादसे में घायल हुए और सात लोगों की मौत हुई।